खाद्य पदार्थो की ‘प्रयोगशाला’ बन चुके मिड डे मील

खाद्य पदार्थो की ‘प्रयोगशाला’ बन चुके मिड डे मील में एक और ‘इनोवेशन’ पर मिलजुलकर फैसला हुआ है। अब प्राइमरी स्कूल के करीब पौने दो करोड़ बच्चे दूध नहीं पिएंगे, ग्लूकोज बिस्किट खाकर तंदुरुस्त रहेंगे।

Basic स्कूलों में अभी तक हर बुधवार मध्याह्न भोजन में तहरी के साथ उबला हुआ 200 मिली. गर्म दूध दिया जाता है। बीते दिनों मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने सभी जनपदों को पत्र भेजकर उनकी राय मांगी थी। उसमें ग्लूकोज बिस्कुट, लाई-चना व चार रुपये कीमत में अन्य वैकल्पिक चीजें थीं। हालांकि, लाई-चना और गुड़ पर सहमती नहीं हो सकी। अधिकतर जनपदों से ग्लूकोज बिस्कुट के प्रस्ताव पर ही सहमति बनी। अब जल्द ही परिषद की अंतिम मुहर लगने के बाद इसे प्रदेश के सभी परिषदीय स्कूलों में लागू किया जाएगा। राजधानी में 1396 प्राथमिक और 637 उच्चप्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें करीब 2,29,525 लाख विद्यार्थी हैं।

प्रदेश में प्राथमिक-उच्च प्राथमिक विद्यालय एवं विद्यार्थियों की संख्या : प्राथमिक विद्यालय 1,14,211 (विद्यार्थी-1,20,94000) वहीं उच्चप्रथामिक विद्यालय 53,818 (विद्यार्थी-55,89000)

मिड-डे मिल में अबतक चला आ रहा साप्ताहिक मेन्यू : सोमवार को रोटी, सोयाबीन अथवा दाल बड़ी की सब्जी और मौसमी फल, मंगलवार को दाल-चावल, बुधवार को तहरी एवं उबला गर्म दूध 200 मिली. (दूध के स्थान पर होगा बिस्कुट), गुरुवार को रोटी-दाल, शुक्रवार को तहरी-सोयाबीन बड़ी युक्त, शनिवार को चावल एवं सोयाबीन युक्त सब्जी।

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