पीसीएस 2019 में भले ही पदों की संख्या बढ़ी, लेकिन कई पदों पर चयन हो पाने के आसार नहीं

उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की पीसीएस 2019 में भले ही पदों की संख्या बढ़ गई है, लेकिन कई पदों पर चयन हो पाने के आसार नहीं हैं। यूपीपीएससी ने प्रारंभिक परीक्षा का जो परिणाम जारी किया है, उसके संकेत दिसंबर में परीक्षा के दिन ही मिल गए थे। जब बड़ी संख्या में प्रतियोगी हंिदूी, विज्ञान जैसे विषयों में पसीना बहा रहे थे। प्रतियोगियों का एक वर्ग परिणाम पर नाखुशी जता रहा है, लेकिन रिजल्ट बिल्कुल वैसा ही है, जिस तरह के आसार जताए गए थे।

यूपीपीएससी में इन दिनों बदलाव का दौर जारी है। पीसीएस 2018 की मुख्य परीक्षा का पैटर्न बदलने के बाद पीसीएस 2019 की प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्र में भी अहम बदलाव हुए थे। यह सब संघ लोकसेवा आयोग यानी यूपीएससी की तर्ज पर किया गया। 15 दिसंबर 2019 को हुई प्रारंभिक परीक्षा के दिन ही प्रतियोगियों ने कहा था कि प्रश्नपत्र स्तरीय रहा है और लीक से हटकर आया। कई प्रतियोगियों ने दबी जुबान कहा था कि सीसैट के प्रश्न भी कठिन रहे, उसे उत्तीर्ण करना मुश्किल रहेगा। यही वजह है कि प्रारंभिक परीक्षा में 557 अभ्यर्थी न्यूनतम अर्हता अंक भी हासिल नहीं कर सके हैं। ज्ञात हो कि आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए सामान्य व ओबीसी के लिए 40 प्रतिशत व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए 30 प्रतिशत अंक हासिल करना अनिवार्य है। बाकी लाभ उसके बाद ही अभ्यर्थी को दिए जाने के निर्देश हैं।

कई अभ्यर्थी ऐसे भी हैं जो सीसैट में अनुत्तीर्ण होने के कारण बाहर हो गए, क्योंकि उनकी ओएमआर शीट का मूल्यांकन ही नहीं हुआ। इतना ही नहीं जिन अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर लिया है, लेकिन उनके मेंस के लायक कटऑफ नहीं थे, उन्हें छूट का लाभ देकर मुख्य परीक्षा के लिए अर्ह किया गया है, लेकिन अब उन्हें मेंस अपनी योग्यता के आधार पर उत्तीर्ण करना होगा और फिर साक्षात्कार में भी सफलता पाने का लक्ष्य कठिन हो गया है, क्योंकि अब मेंस स्तरीय हो रहा है साथ ही साक्षात्कार के लिए पद के सापेक्ष सिर्फ दो ही अभ्यर्थी चयनित होंगे।

संशोधन के लिए बढ़ा इंतजार

आयोग ने पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा के तीसरे दिन उत्तरकुंजी जारी करके आपत्तियां मांगी थीं, अभ्यर्थियों ने करीब एक दर्जन सवालों पर आपत्तियां भी भेजीं, लेकिन संशोधित उत्तरकुंजी के लिए उन्हें अंतिम चयन तक का इंतजार करना होगा। हालांकि इस तरह का प्रयोग पहले भी हुआ था, जिसे कोर्ट के आदेश पर बदलना पड़ा था।

हाईकोर्ट में जल्द होगी याचिका

संशोधित उत्तरकुंजी व कटऑफ अंक आदि को लेकर प्रतियोगियों का एक वर्ग जल्द ही हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेगा। उनका कहना है कि यह व्यवस्था नहीं बदली जानी चाहिए, क्योंकि इसमें पारदर्शिता नहीं रहेगी।

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