बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दे रही हैं ममता

जिले के कई शिक्षक-शिक्षिकाएं परिषदीय स्कूलों के मिथक को तोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। अपनी मेहनत और लगन से स्कूलों को स्मार्ट विद्यालयों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है। पठन-पाठन के लिए आधुनिक तकनीक का भी भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। बच्चों को इनोवेशन से जोड़ने के साथ उन्हें ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। इससे बच्चे भी पढ़ाई में दिलचस्पी दिखाते हैं। ऐसा ही काम कर रही हैं चाका ब्लॉक के तेंदुआवन मॉडल प्राइमरी स्कूल की सहायक शिक्षिका ममता मिश्र। जो मोबाइल और लैपटॉप के जरिए बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दे रही हैं। वह यू-ट्यूब पर अपना चैनल भी चलाती हैं।

थ्री एच सिद्धांत (हेड, हैंड व हार्ट) पर कार्य करने वाली ममता 2015 से कार्यरत हैं। अपने व्यक्तिगत प्रयासों से उन्होंने न सिर्फ अपनी कक्षा व कक्ष को आधुनिक बनाया, बल्कि अपने वेतन से बच्चों के लिए डेस्क और बेंच भी बनवाई। कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर स्कूल में प्रार्थना ड्रम, ग्रीन बोर्ड समेत अन्य वैज्ञानिक उपकरण भी स्कूल में मुहैया कराए। जहां ‘विज्ञान के जादू’ कार्यक्रम के तहत विज्ञान की सरल अवधारणा से न सिर्फ बच्चों को परिचित कराया, वहीं खेल-खेल में पढ़ने की विधा से उनमें अध्ययन के प्रति ललक पैदा की। इन कार्यक्रमों की सफलता के कारण ट्रेनी व साथी शिक्षकों की मांग पर उन्होंने वेबसाइट और इंटरनेट के जरिए अपने पठन-पाठन के सरल, अद्भुत एवं अभिनव पद्धतियों को साझा किया। कक्षा छह, सात और आठ की ‘महान व्यक्तित्व’ पुस्तक के ऑडियो संस्करण में पांच पाठ सहायक शिक्षिका की आवाज में हैं। कक्षा छह, सात और आठ की विज्ञान की पुस्तक लेकिन में भी इन्होंने सहयोग किया है। इन उपलब्धियों के कारण इन्हें दो बार राज्य स्तरीय कहानी पुरस्कार मिल चुका है।

कहानी को ‘कथा मंदाकिनी’ में मिला स्थान

ममता बताती हैं कि राज्य स्तर पर प्रकाशित पुस्तक ‘कथा मंदाकिनी’ में इनकी स्वरचित कहानी को स्थान मिल चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में उनके अनूठे प्रयासों की प्रसंशा कर चुके हैं।

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