चयन बोर्ड का निर्देश उपलब्ध पदों पर ही होगा कालेज आवंटन

प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक यानी टीजीटी वर्ष 2011 के पांच विषयों का अंतिम रिजल्ट माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने जारी कर दिया है। जिस प्रकार प्रवक्ता के विषयों में जिला विद्यालय निरीक्षकों को विज्ञापित पद संबंधित कालेजों में खाली नहीं मिले थे, ठीक वैसे ही स्थिति टीजीटी के सामने आ रही है। चयन बोर्ड ने विज्ञापित पदों के सापेक्ष चयन सूची भी जारी की है लेकिन, कालेज उन्ही अभ्यर्थियों को आवंटित किये जायेंगे जितने पद सत्यापन में कालेजों में उपलब्ध मिले हैं। इससे अंतिम रूप से चयनित 22 अभ्यर्थियों को नियुक्ति अभी नहीं मिल सकेगी।

माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक कालेजों के लिए प्रधानाचार्य, प्रवक्ता व स्नातक शिक्षकों का चयन करता है। जिन पदों का अंतिम रिजल्ट जारी हुआ है उनकी लिखित परीक्षा का आयोजन 16 व 17 जून 2016 को हुआ था और अक्टूबर व नवंबर 2018 में साक्षात्कार कराया गया। अब नियमावली के प्रावधान के अनुरूप अंतिम रिजल्ट जारी किया गया है। बालक व बालिकाओं के लिए 5 विषयों में कुल 343 पद विज्ञापित हुए थे, जबकि सत्यापन में वास्तविक पद महज 321 मिले हैं। इसीलिए अंतिम रूप से चयनित 22 अभ्यर्थी अभी अधर में हैं। चयन बोर्ड की ओर से कहा गया है कि जिन्हें पदों की अनुपलब्धता के कारण संस्था का आवंटन नहीं होगा, उनके मामले सेवा नियमावली 1998 के नियम 13(3) द्वारा शासित होंगे। चयन बोर्ड ने यह स्पष्ट नहीं किया है की कालेज आवंटन कब तक होगा। चयन बोर्ड की वेबसाइट www.upsessb.org पर अभ्यर्थी विस्तृत जानकारी देख सकते हैं।

गणित में ही 16 पद नदारद : चयन बोर्ड ने विज्ञापित पदों के सापेक्ष सामान्य, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति व अन्य वर्गो के बालक और बालिकाओं का चयन किया है। जिला विद्यालय निरीक्षकों से विज्ञापित पदों का सत्यापन कराया गया और प्रत्येक विषय के वास्तविक पदों का वर्गवार ब्योरा भी दिया गया है। सचिव की ओर से कहा गया है कि अभ्यर्थियों को वास्तविक पदों के सापेक्ष ही कालेज आवंटित होंगे। इसमें गणित विषय में विज्ञापित व वास्तविक पदों का अंतर 16 का है, जबकि अन्य विषयों में वास्तविक रूप से छिटपुट पद कम हो रहे हैं।UP Madhayamik Shiksha Seva Chayan Board

0 Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.