टीईटी: हिंदी-भाषा प्रश्नपत्र में बड़ी संख्या में अशुद्धियां

परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से आठ जनवरी को प्रदेशभर में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) का आयोजन कराया गया। इसके हिंदी-भाषा प्रश्नपत्र में बड़ी संख्या में अशुद्धियां मिली हैं। भाषाविद्-समीक्षक डॉ. पृथ्वीनाथ पांडेय ने प्रश्न और वैकल्पिक उत्तरों में काफी अशुद्धियां पकड़ी है। उन्होंने शासन को शब्द-सर्जन, कारक, संधि, लिंग-वचन, क्रिया, वर्तनी आदि से संबंधित अशुद्धियों पर गंभीरता से विचार करके उचित कदम उठाने का सुझाव दिया है।

डॉ. पृथ्वीनाथ के अनुसार हिंदी-भाषा का भाग प्रश्न 31वें से आरंभ होता है। यहां दिये गये एक गद्यांश के ऊपर एक निर्देश किया गया है, जबकि ‘निर्देश’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। प्रश्न संख्या 32 एवं 33 के स्थान पर प्रश्न-संख्या 32 और 33 होगा। ऐसा इसलिए कि प्रश्न और संख्या तत्पुरुष समास का विग्रह है और विग्रह की स्थिति में प्रश्न और संख्या में योजक चिह्न् लगता है। इसी में ‘एवं’ के स्थान पर 32 और 33 होगा; क्योंकि ‘एवं’ का अर्थ ‘और भी’ होता है। इसी गद्यांश के प्रथम वाक्य में ‘तत्व’ के स्थान पर ‘तत्त्व’ होगा, जो कि वर्तनी-दोष है। इसी में एक वाक्य में प्रयुक्त ‘जितने भी वाद प्रचलित हैं’ के बाद के वाक्यांश में ‘वह’ के स्थान पर ‘वे’ होगा। साथ ही गांधीजी के स्थान पर गांधी जी होगा; क्योंकि उनका उपनाम ‘गांधी’ था, न कि ‘गांधी जी’। ‘जी’ तो एक प्रकार का आदरसूचक शब्द है, जो अलग से है।

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32वें प्रश्न में ‘बताइये’ के स्थान पर ‘बताइए’ होगा और इस वाक्य के अन्त में ‘पूर्ण विरामचिह्न्’ लगेगा। 33वें प्रश्न के उत्तर के पहले विकल्प में ‘राजनीतिक अध्यात्म’ में ‘राजनीतिक’ के बाद अल्प विरामचिह्न् (,) का प्रयोग होगा। 37 वां प्रश्न रहीम के दोहे पर आधारित है; किन्तु दोहे का उद्धरण करते समय युगल उद्धरणचिह्न् का प्रयोग नहीं किया गया है, जो कि विरामचिह्न्-दोष है। 39वें में ‘निम्न’ के स्थान पर ‘निम्नलिखित’ होगा। 40वां प्रश्न आपत्तिजनक है; क्योंकि उसका ‘हंिदूी-भाषा’ से कोई संबंध नहीं है। 41वें और 42वें प्रश्नों के पद्यांश में ‘लला इन’ के स्थान पर ‘ललाइन’ दिया गया है। 42वें प्रश्न में ‘उपरोक्त’ के स्थान पर ‘उपयरुक्त’ होगा। 45वें प्रश्न में दिये गये उदाहरणात्मक वाक्य के अन्त में पूर्ण विरामचिह्न् लगेगा। 48वें प्रश्न में एक कहावत ‘छछूंदर के सिर पर चमेली का तेल’ दी गयी है और कहावत एक पूर्ण वाक्य है। इसके बाद भी कहावत के अंत में पूर्ण विरामचिह्न् नहीं लगाया गया है। 50वें से 52वें तक के प्रश्नों के अंत में विवरणचिह्न् (:/:–) लगेगा और दिये गये अन्तिम विकल्प के अंत में पूर्ण विरामचिह्न् भी।

53वें प्रश्न में ‘विकल्पों में’ के स्थान पर ‘विकल्पों में से’ होगा। 55वां प्रश्न और उसके सभी विकल्प एक सिरे से भ्रामक, अशुद्ध तथा आपत्तिजनक हैं। इसके अंतर्गत संतान, कढ़ी, चील तथा सरसों में से कौन-सा शब्द पुल्लिंग पूछा गया है, जबकि प्रचलित अर्थो में ये सभी शब्द ‘स्त्रीलिंग’ के हैं।

’ आठ जनवरी को प्रदेश भर में कराई गई थी परीक्षा

’शब्द-सर्जन, कारक, संधि, लिंग व वचन, क्रिया, वर्तनी की गलतियां मिली

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