गुलाबी नगरी में शुरू हुआ शब्दों का महाकुंभ – जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल

गुलाबी नगरी जयपुर की सर्द सुबह गुरुवार को शब्दों के महाकुंभ ‘जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल’ के साथ गरमा उठी। आयोजन स्थल डिग्गी पैलेस में शब्दों, विचारों, मत, विमत, कला, संस्कृति और विज्ञान की गंगा पूरे दिन एक साथ-एक लय में बही। इस दौरान इसके सत्र स्थल वह घाट बन गए, जहां लोगों ने जमकर इस महाकुंभ का आनंद लिया।

जयपुर में हर साल लगने वाला शब्दों का पांच दिवसीय मेला गुरुवार से शुरू हो गया। श्रुति विश्वनाथन के शास्त्रीय गायन और नगाड़ों व शंख-ध्वनि के साथ शुरू हुए लिटरेचर फेस्टिवल का पहला ही उद्बोधन आज के दौर में विज्ञान की जरूरत पर था।

इसने इस बात को रेखांकित किया गया कि कला, साहित्य और विज्ञान अलग-अलग नहीं हैं। ये बस धाराएं हैं, जो कभी भी एक हो सकती हैं। फेस्टिवल डायरेक्टर संजोय के. रॉय ने कहा कि हम विरोधी मत को आवाज देने के लिए भी एकत्र होते हैं। उन्होंने कहा कि 12 वर्ष पहले जब हमने इसे शुरू किया था तो हम 170 आदमियों के एकत्र होने का भी इंतजार कर रहे थे।

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