क्या मिड डे मील चखना भी शिक्षकों के कर्तव्य और दायित्व में शामिल है?

लखनऊ : विधान परिषद में बुधवार को सरकार के लिए उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई जब शिक्षक दल के जगवीर किशोर जैन ने यह जानना चाहा कि क्या मिड डे मील चखना भी शिक्षकों के कर्तव्य और दायित्व में शामिल है? शिक्षक दल के सुरेश कुमार त्रिपाठी ने भी यही सवाल उठाया। सरकार इसका कोई जवाब नहीं दे सकी।

शिक्षक दल ने तीन दिसंबर को मुजफ्फरनगर के मुस्तफाबाद पचेड़ा स्थित जनता इंटर कालेज में बच्चों को परोसे गए मिड-डे मील में मरा हुआ चूहा मिलने का मामला उठाया था। इस दूषित भोजन को खाने से कुछ बच्चे और एक शिक्षक बीमार हो गए थे। शिक्षक दल का आरोप था कि मिड डे मील की आपूर्ति करने वाले गैर सरकारी संगठन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर स्कूल के प्रधानाचार्य और शिक्षकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवा दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एनजीओ को संरक्षण दे रही है। सदन में मौजूद बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ.सतीश चंद्र द्विवेदी ने इस आरोप का खंडन किया। उन्होंने बताया कि मिड डे मील की आपूर्ति करने वाले एनजीओ के अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जा चुकी है। एनजीओ को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। प्रधानाचार्य और शिक्षकों के खिलाफ एफआइआर इसलिए दर्ज कराई गई है क्योंकि यह शिक्षक का दायित्व है कि पहले वह मिड डे मील चखे और फिर पंजिका में यह दर्ज करे कि भोजन उपयुक्त है या नहीं। यदि वे जांच में निदरेष पाये जाएंगे तो बरी हो जाएंगे।

वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय पर मांगी रिपोर्ट : राज बहादुर सिंह चंदेल ने वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के शोषण का मुद्दा उठाया। चेत नारायण सिंह ने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों को 15 हजार रुपये मानदेय देने का आश्वासन वादा कोरा साबित हुआ। नेता सदन डॉ.दिनेश शर्मा ने कहा कि निदेशक माध्यमिक शिक्षा से रिपोर्ट मांगी गई है।

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