इंटरनेट ने रोकी ऑनलाइन शिक्षा की रेस

अलीगढ़ : लॉकडाउन में ‘पढ़े ऑनलाइन भारत’ मिशन ने नई दिशा जरूर दी है। मगर इंटरनेट सेवा दमदार न होने से ऑनलाइन शिक्षा रूपी भवन डगमगा रहा है। ऑनलाइन क्लास के दौरान इंटरनेट अटकने से कक्षाएं जहां की तहां रुक जाती हैं।

बाबूलाल जैन इंटर कॉलेज के नौवीं के छात्र तरुण मिश्र ने बताया कि, सुबह नौ बजे कंप्यूटर खोलकर बैठे तो कनेक्टिविटी फेल रही। आधा घंटा इंतजार में बीत गया। जब कनेक्टिविटी आई तो गुरुजी के लेक्चर का वीडियो आगे बढ़ चुका था। बाद में फोन पर पूछकर तैयारी की।

प्राथमिक विद्यालय इंग्लिश मीडियम एलमपुर के कक्षा छह के छात्र सागर कुमार ने बताया कि, सुबह नौ बजे लैपटॉप लेकर बैठे तो पाठ्य सामग्री दिखी। ओपन करने में 35 मिनट लग गए। गुरुजी ने वाट्सएप पर वीडियो डाला वो तो कक्षा समाप्त होने तक डाउनलोड नहीं हुआ। ये समस्या शिक्षक-शिक्षिकाओं के सामने भी आ रही है।

चेन टूटने से गड़बड़ा जाती व्यवस्था: नौरंगीलाल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शीलेंद्र यादव बताते हैं कि, जूम एप पर विद्यार्थियों को जोड़कर पढ़ा रहे थे। 25 मिनट सब ठीक चला, इसके बाद इमेज रुक गई। विद्यार्थियों का हटना शुरू हो गया। फोन किया तो पता चला कि, स्क्रीन पर मेरी फोटो रुकी हुई थी व आवाज नहीं आ रही थी। एक बार चेन टूटने से पूरी व्यवस्था गड़बड़ा गई।

स्मार्टफोन न होना बड़ी समस्या : गांवों के सरकारी स्कूल व कॉलेजों के विद्यार्थियों के पास स्मार्टफोन न होना भी ‘पढ़े ऑनलाइन भारत’ मिशन में ब्रेक लगा रहा है।

इंटरनेट की बेहतर स्पीड न होने से पाठ्य सामग्री डाउनलोड होने के इंतजार में छठवीं का छात्र सागर कुमार ’ जागरण

ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान इंटरनेट सेवा धीमी होने पर अटके नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शीलेंद्र यादव ’ जागरण

ब्रॉडबैंड की स्पीड कम हुई तो मोबाइल से इंटरनेट जोड़ने का प्रयास करते नारायणा कोचिंग सेंटर के टेक्निकल हेड अर¨वद तिवारी ’ जागरण

लैपटॉप पर कनेक्टिविटी न मिली तो किताब लेकर बैठ गया बाबूलाल जैन इंटर कॉलेज में नौवीं का छात्र तरुण मिश्र ’ जागरण

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के पास स्मार्टफोन न होना भी समस्या

कमजोर नेटवर्क ने रुकवा दी क्लास

नारायणा कोचिंग सेंटर के टेक्निकल हेड अर¨वद दीक्षित बताते हैं कि ऑनलाइन कक्षा के दौरान इंटरनेट कम होने से इमेज व लेक्चर क्लियर नहीं हो पाए। एक दिन पढ़ाई शुरू होने के 20 मिनट बाद इंटरनेट अटका तो विद्यार्थी शंका समाधान के प्रश्न पूछने लगे। धीरे-धीरे 40 से 50 विद्यार्थी एक साथ बोलने लग गए। अटकते इंटरनेट पर उनको समझाना संभव नहीं था।

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