मिड डे मील में दूध की बजाय फल या बिस्कुट दिया जाए

लखनऊ : मध्याह्न भोजन योजना के जिला समन्वयकों ने बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ.सतीश चंद्र द्विवेदी से अनुरोध किया है कि परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को दूध न दिया जाए। दूध के बजाय कुछ अन्य विकल्पों पर विचार किया जाए। जिला समन्वयकों का कहना था कि बच्चों के लिए दूध कीे व्यवस्था करने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं। मंत्री ने उनके अनुरोध पर विचार करने के लिए कहा है। वहीं यह भी दो टूक कहा कि मिड-डे मील में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कुछ जिलों में मिड-डे मील में गड़बड़ियों के मामले प्रकाश में आने पर बेसिक शिक्षा मंत्री ने बुधवार को इसकी समीक्षा के लिए मध्याह्न भोजन योजना के जिला समन्वयकों की बुधवार को बैठक बुलायी थी। यह बैठक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के सभागार में हुई। जिला समन्वयकों ने मंत्री को बताया कि बच्चों को बुधवार को दूध देने की व्यवस्था है। हफ्ते में एक दिन दूध की व्यवस्था करने में दिक्कत आती है। दूधिये एक दिन दूध देने के लिए तैयार नहीं होते हैं। परिषदीय विद्यालय दूरदराज के इलाकों में हैं जहां पराग या अमूल के दूध के पैकेट भी प्राय: सुलभ नहीं होते हैं। गर्मी के दिनों में दूध के फटने या खराब होने की भी आशंका होती है। दूध में पानी मिलाने पर नजर रख पाना भी मुश्किल है। लिहाजा जिला समन्वयकों ने बच्चों को दूध के स्थान पर फल या पौष्टिक बिस्कुट आदि देने का सुझाव दिया। मंत्री ने कहा कि शासन उनके सुझावों पर विचार करेगा। वहीं विधायक निधि से मदद लेकर स्कूलों में डाइनिंग टेबल उपलब्ध करवाकर उस पर विद्यार्थियों को भोजन करवाने का भी प्रस्ताव तैयार किया गया। मंत्री ने कहा कि जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला टास्क फोर्स और ब्लाक स्तर पर उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स द्वारा किए जा रहे निरीक्षण की हर महीने समीक्षा करें।

 

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