शासनादेश के बावजूद सैकड़ों शिक्षामित्रों की तैनाती मूल विद्यालयों में नहीं हो सकी

शासनादेश के बावजूद सैकड़ों शिक्षामित्रों की तैनाती (पद स्थापन) मूल विद्यालयों में नहीं हो सकी। इसमें काफी संख्या महिला शिक्षामित्रों की है, जिनकी तैनाती उनके ससुराल के पते (स्कूल) पर नहीं की गई। इससे महिला शिक्षामित्रों को भी अपने घर से करीब 70-80 किमी. दूर विद्यालयों में पढ़ाने के लिए जाना पड़ रहा है। मूल विद्यालयों में पहुंचने के लिए शिक्षामित्र बीएसए कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।

लगभग दो वर्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों का शिक्षक पद पर समायोजन निरस्त कर दिया था। उसके एक वर्ष बाद प्रदेश सरकार ने शासनादेश जारी कर सभी शिक्षामित्रों को उनके मूल विद्यालय, महिलाओं को उनके ससुराल के पते पर विकल्प के आधार पर तैनाती के लिए कहा था। दावा है कि उस शासनादेश के क्रम में प्रयागराज जिले में आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के धरना-प्रदर्शन के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी ने करीब 2200 शिक्षामित्रों की तैनाती मूल विद्यालय में कर दिया, लेकिन अब भी लगभग 13-14 सौ शिक्षामित्रों की तैनाती उनके मूल विद्यालयों में नहीं हुई। महिला शिक्षामित्रों को भी उनके ससुराल के पते पर पदस्थापित नहीं किया गया। आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अश्वनी कुमार त्रिपाठी का आरोप है कि बीएसए की मनमानी के कारण करीब 13-14 सौ शिक्षामित्रों का पद स्थापना उनके मूल विद्यालय में नहीं हो सका है। अब एसोसिएशन धरना-प्रदर्शन की तैयारी में है।

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