69000 शिक्षक भर्ती केस की ग्राउंड रिपोर्ट

*अवैध बीएड 69k ग्राउंड रिपोर्ट:-*

जिस तरह विपक्षी पैरोकारों ने बीएड मामले में दायर याचिकाओं को स्पेशल अपील से विच्छेदित कराया था। उसकी भरपाई का प्रयास टीम द्वारा उन्ही की स्पेशल अपील पर फ़ाइल ऑब्जेक्शन के माध्यम से की जा रही है। कोर्ट में हो रहे सभी आर्गुमेंट ऑन रिकॉर्ड हैं…रिटेन सबमिशन के अंतर्गत ये सभी बातें कोर्ट में फ़ाइल की जाएंगी। ध्यान रहे बीटीसी ट्रेंड अभ्यर्थियों का हक इस 69k सहायक अध्यापकों की भर्ती में पहले है…ट्रेंड अभ्यर्थियों का नुकसान कोई अनट्रेंड या अधूरी अहर्ता का व्यक्ति नही कर सकता…बीटीसी ट्रेंड अभ्यर्थियों के हक में आज की बहस के कुछ महत्त्वपूर्ण अंश।

*1:- बहस की शरुआत बेसिक शिक्षा अधिनियम 1972 के आर्टिकल 19 से हुई जिसकी मूल भावना से हटकर सरकार द्वारा किये गए संशोधनों यथा 23, 24, 25 को गलत और राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित बताया गया। ध्यान रहे अधिनियम में वर्णित शब्दों और शर्तों को किसी भी नए अमेंडमेंट में बदला नही जा सकता है। इस एक्ट की मूल भावना यह कहती है की इस अधिनियम के अंतर्गत किये जाने वाले अमेंडमेंट गजट होने के दिन से ही प्रभावी माने जाएंगे, जबकि सरकार ने 23वें, 24वें, 25वें संशोधन को 1 जनवरी 2018 एक बर्ष पूर्व से लागू माना है।*

*2:- आरटीई एक्ट 2009 के अंतर्गत बीटीसी ट्रेंड टीचर्स के समान किसी ट्रेनी को ऐप्लिकेबल नही माना जा सकता।*

*3:- 23 अगस्त 2010 में जारी भारत के राजपत्र में वर्णित शर्त जिसमे बीएड को प्राइमरी में शामिल करने हेतु छूट का प्राविधान था ये केवल उस दशा में था जब उ0 प्र0 में ट्रेंड बीटीसी की संख्या उपलब्ध न हो…इसलिए उस शर्त का उल्लंघन कर केंद्र ने बीएड को प्राइमरी में मौका दिया।*

*4:- भर्ती के सभी 69k पदों पर परीक्षा 22वें संशोधन के अंतर्गत विज्ञापित है..अतः अग्रिम कोई भी कार्यवाही इसी संशोधन के मद्देनजर होगी।*

*5:- पूर्व में किये गए 23, 24, 25 संशोधनों को कोर्ट यानी सिंगल बेंच से छिपाकर सुनवाई के दौरान एरर फाइंडिंग पर रनअप किया गया।*

*6:- बेसिक शिक्षा के 40 सालों के इतिहास में पहली बार सरकार ट्रेंड और ट्रेनी टीचर्स में अंतर नही समझ पा रही है।*

*7:- बीएड हायर एजुकेशन के लिए एलिजिबिलिटी रखता है…प्राइमरी में पढ़ाने के लिए योग्यता को पूरी नही कर रहा इसलिए इन्हें 6 माह के ब्रिज कोर्स के माध्यम से इन्हें बेसिक शिक्षा में ट्रेनिंग पूरी करने को कहा गया..जिससे उन्हें चाइल्ड सायकोलॉजी का कुछ ज्ञान हो जाए।*

*8:- 23वें संशोधन के रूल 8(2)a और रूल 8(2)b में वर्णित शर्ते एक दूसरे का विरोधाभास कर रही हैं…a कहता है की बीएड डायरेक्ट असिस्टेंट टीचर के पद पर रिक्रूट होगा, जबकि b कहता है…6 माह का सेतु पाठ्यक्रम भी जरूरी है..अगर सेतु पाठ्यक्रम जरूरी है तो ट्रेंड अभ्यर्थियों के समान सहायक अध्यापक का पद रूल के हिसाब से इलीगल है।*

*9:- 22वें संशोधन में क़्वालिटी प्वाइंट मार्क्स का निर्धारण ही नही है…जब हमने पिटीशन फाइल कर चैलेंज किया तब जाकर 25वें संशोधन को प्रभाव में लाया गया वो भी रेट्रोस्पेक्टिव नेचर में…जो 1972 एक्ट की धारा 19 के विरुद्ध है।*

बहस का सम्पूर्ण पार्ट बीटीसी/डीबीटीसी ट्रेंड टीचर्स के हित में कोर्ट को समझाने का प्रयास किया गया है…अभी कुछबिंदु शेष हैं जिन्हें पैनल बुधवार की होने वाली बहस में रखेगा…ध्यान रहे पासिंग और अवैध योग्यता एक सिक्के के दो पहलू हैं और सिक्का तभी चलेगा जब दोनों पहलू चमक रहे होंगे। बहुत से साथी 14548/2019 याचिका से सम्बद्ध याचिकाओं के बारे में चिंतित हैं…आप सभी निश्चिंत रहिये…सही समय पर फ्रंट फेसिंग बीटीसी ही करेंगे, कुछ सम्भावनाओं के चलते और मामले को शॉर्ट में निपटाने में सहयोग हम भी कर रहे हैं।

*© आकाश पटेल – 9451683646 ©*
*© राजवसु यादव (2015 बैच) – 7983424120 ©*
*कुलदीप वर्मा (2014 बैच) – 9451314507*
*मनीष कुमार (2012 बैच) – 8445008910*
*पुनीत पटेल (2013 बैच) – 9532873746*
*मंजुल मयंक सुल्लेरे (2015 बैच) – 8858562516*

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