भ्रष्टाचार के आरोपित शिक्षक को सम्मान देने चली थी सरकार

लखनऊ : शिक्षकों को सम्मानित करने चली योगी सरकार के कारिंदों ने गरिमामयी सम्मान की ही साख गिरा दी। शिक्षक दिवस पर सरस्वती सम्मान के लिए चुने गए तीन masters में ऐसे व्यक्ति का भी नाम शामिल कर लिया गया, जो भ्रष्टाचार के मामले में चर्चित रहे हैं। गनीमत रही कि सम्मान दिए जाने के चंद घंटे पहले मामला खुल गया और बुधवार रात को सूची में से डॉ. राजेंद्र प्रसाद वर्मा का नाम हटा दिया गया। मगर, सरकार की कार्य संस्कृति और स्क्रीनिंग कमेटी तो सवालों के घेरे में आ ही गई।

सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दंभ भरती है और शिक्षा विभाग के अफसरों ने भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे शिक्षक को ही सरकार के हाथों सम्मानित कराने का इंतजाम कर दिया। दरअसल, उच्च शिक्षा विभाग शिक्षक दिवस पर गुरुवार को आदर्श कार्य, आचार, व्यवहार वाले शिक्षकों को सम्मानित करने जा रहा है। विभाग की ओर से दो सितंबर को जारी शासनादेश में तीन शिक्षकों को सरस्वती पुरस्कार और छह शिक्षकों को ‘शिक्षक श्री’ सम्मान देने की घोषणा की गई। सरस्वती सम्मान के लिए चुने गए तीन शिक्षकों में उन्नाव के राजकीय डिग्री कॉलेज गोसाईं खेड़ा में हंिदूी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र प्रसाद वर्मा का नाम भी शामिल था। बसपा मुखिया मायावती के करीबी रहे डॉ. वर्मा पर बसपा शासनकाल में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का अध्यक्ष रहते बिना परीक्षा दिलाए अपने रिश्तेदार को टीजीटी परीक्षा पास कराने का आरोप लगा था।

इसके बावजूद शिक्षकों के चयन के लिए बनाई गई स्क्रीनिंग कमेटी ने इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए वर्मा का नाम शामिल कर लिया। इसके पीछे की कहानी अभी उजागर नहीं हुई है लेकिन, विवाद सामने आने पर सम्मान समारोह के 12-14 घंटे पहले डॉ. वर्मा का नाम सूची से हटा दिया गया। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा राजेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि डॉ.वर्मा का नाम हटाये जाने के बाद अब सिर्फ दो लोगों को ही सरस्वती सम्मान दिया जाएगा।

मेरे ऊपर लगे आरोप की जांच डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय द्वारा कराई गई। आरोप निराधार हैं।’

डॉ. राजेंद्र प्रसाद वर्मा

शासन से कार्य आचरण की रिपोर्ट मांगी गई थी। एसपी और एसडीएम से जांच करवा कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।

देवेंद्र कुमार पांडेय, जिलाधिकारी, उन्नाव

शर्मनाक! चयन के बाद मंगानी पड़ी सभी शिक्षकों की रिपोर्ट

चयन समिति के कारनामे ने इस सम्मान के इतिहास में काला पन्ना जोड़ दिया। प्रो. वर्मा का विवाद सामने आने के बाद विभाग के आला अधिकारी इतने असहज हो गए कि सम्मान के लिए चयनित सभी शिक्षकों की रिपोर्ट जिलाधिकारियों से मांगी गई। उन्नाव के अधिकारियों ने डॉ. वर्मा के कार्य, चाल-चलन की रिपोर्ट भेजी, तब उन्हें सम्मानित न करने का निर्णय लिया गया।

0 Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.