68500 शिक्षक भर्ती-अब शासन पर निर्भर है जिला आवंटन में सुधार

68500 शिक्षक भर्ती में चयन हुए अभ्यर्थयों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनको जिला आवंटन का निर्णय दिया है। आरक्षित वर्ग के मेधावी उम्मीदवारों को राहत मिलना तय है, जिन अभ्यर्थी ने अच्छे अंक प्राप्त किये है और दूर के जिलों में पढ़ा रहे हैं। उनको अभी तक पसंदीदा जिलों में नहीं पहुंच सकेंगे। इसमें शासन की पहल काम कर सकती है, बशर्ते वह भर्ती की सीटों के सापेक्ष नए सिरे से जिला आवंटन करा दे।

असल में शिक्षा विभाग के अधकारियों ने शिक्षक के लिए हुई लिखित परीक्षा में पास अभ्यर्थीओं को मनमाने तरीके से जिला आवंटित कर दिया था। भर्ती के नियमानुसार कुल सीटों के सापेक्ष पास अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलती तो विवाद ही न होता, लेकिन विभागीय अधिकारीयों ने लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण 41556 अभ्यर्थियों को ही कुल सीटें मानकर जिला आवंटन किया, इससे 6127 अभ्यर्थी उत्तीर्ण होने के बावजूद बाहर कर दिए गए थे।

अभ्यर्थियों के द्वारा प्रदर्शन करने पर शासन के हस्तक्षेप बाहर किए गए अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई। उन्हें जिला आवंटित करने में कुल सीटों का संज्ञान लिया गया, इसीलिए दूसरी सूची के वे अभ्यर्थी जिन्होंने लिखित परीक्षा में कम अंक हासिल किए फिर भी मनचाहा जिला पाने में सफल रहे। अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि भर्ती की कुल सीटों के आधार पर जिला आवंटन अफसरों ने पहले ही कर लिया होता तो वे गृह जिलों में आसानी से तैनाती पा जाते।

नियुक्ति पाने वालों का नहीं बदलेगा जिला: नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थीओं का जिला नहीं बदलेगा क्योकि उन्होंने जिला आवंटन के समय शपथ पत्र में लिखा था कि भविष्य में जिला नहीं बदला जाएगा। इस बाध्यता के चलते वे आगे होने वाले अंतर जिला तबादलों में शामिल नहीं हो सकते। वहीं, जिला आवंटन गड़बड़ होने से तमाम अभ्यर्थी अपने गृह जिलों से दूर तैनात हो गए हैं।

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