शिक्षक भर्तियों पर अब जागी यूपी सरकार

यूपी के अशासकीय सहायताप्राप्त कालेजों में 35 हजार से अधिक शिक्षक पद लंबे समय से खाली हैं। इन खाली पड़े शिक्षक पदों को भरने के लिए चयन की रफ्तार बेहद धीमी है। चयन बोर्ड का पुनर्गठन होने के सवा साल में बसपा शासन की एक भर्ती जैसे-तैसे पूरी की है। पांच माह बाद 2016 की लिखित परीक्षा का परिणाम नहीं आया है, वहीं नई शिक्षक भर्ती का चयन दो साल में करने की समय सारिणी तय हुई है। शासन ने इस पर नाखुशी जाहिर करते हुए चयन बोर्ड के अध्यक्ष व सदस्यों को तलब किया है।

माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र अशासकीय सहायताप्राप्त कालेजों के लिए प्रधानाचार्य, प्रवक्ता व प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक के चयन करता है। चयन बोर्ड का अप्रैल 2018 में का पुनर्गठन हुआ। नई टीम ने वर्ष 2011 की टीजीटी 1479 व पीजीटी के 393 पदों की लिखित परीक्षा का परिणाम और साक्षात्कार कराकर चयन किया है। लिखित परीक्षा 15 से 17 जून 2016 को हुई थी। कुछ भर्तियाँ कोर्ट चली गई थी, कोर्ट ने पुरानी भर्तियों के परिणामों को संशोधित करने का आदेश दिया था और जो नए चयनित हुए उन्हें कालेज आवंटित किया गया।

2016 के 9294 पदों का चयन रुका: वर्ष 2016 के लिए पीजीटी के 1344 व टीजीटी के 7950 पदों के लिए लिखित परीक्षा फरवरी व मार्च 2019 में आयोजित की गई। आंसर शीट जारी कर आपत्तियां ली गईं लेकिन अब तक उनका रिजल्ट नहीं आया है।

इन भर्तियों का नंबर कब आएगा: शासन ने चयन बोर्ड को माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की ओर से संचालित कालेजों में प्रधानाचार्य व शिक्षक चयन और हाईकोर्ट ने सहायताप्राप्त माध्यमिक कालेजों से संबद्ध जूनियर विद्यालयों के लिए शिक्षक चयन का आदेश दिया है। इन भर्तियों अभी विचार शुरू नहीं हुआ है। वहीं, शासन राजकीय कालेजों के लिए एलटी ग्रेड शिक्षक चयन का जिम्मा भी चयन बोर्ड को देने की तैयारी में है।

0 Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.