69000 शिक्षक-भर्ती मामले में हुई सुनवाई का पूरा सार

69000 shikshak bharti की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की बेंच में फ्रेश केस 4 नंबर पर हुई थी। जिसमें अभ्यर्थियों की तरफ से अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने सुनबाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश को बताया कि किस तरह से विपक्षी ने कोर्ट को गुमराह कर B.Ed अभ्यर्थियों को बाहर करने वाली याचिका और 9097 वाली याचिका दोनों को आपस में टैग करा दिया गया। इससे मुख्य न्यायाधीश विपक्षी वकील पर नाराज होते हुए कहा जुलाई में आप एक एप्लीकेशन लगा दे जिससे दोनों केस को अलग किया जा सके।

B.Ed अभ्यर्थियों को बाहर करने वाली याचिका कोर्ट नंबर 2 में लगी हुई थी लेकिन कोर्ट नंबर दो आज बैठी नहीं थी जिससे इस पर सुनबाई नहीं हो पाई। इसीलिए उस बेंच के जितने भी फ्रेश केस थे उन सभी को कोर्ट कोर्ट नंबर 1 में ट्रांसफर कर दिया गया था। सीनियर अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि B.Ed मैटर और 9097 मैटर दोनों अलग अलग केस है दोनों के ग्राउंड अलग हैं। इसीलिए दोनों को आपस में टैग नही किया जा सकता। जिस पर मुख्य न्यायाधीश सहमत दिखे और कहा आपका केस 12:30 बजे लिस्टेड कर देता हूं।

कोर्ट में जब 12:30 बजे सुनवाई शुरू तो सीनियर अधिवक्ता प्रशांत चंद्रा द्वारा ने बहस शुरू की गई और कोर्ट
में बहस करते हुए सीनियर अधिवक्ता ने पूरा मैटर समझा दिया, तब तक कोर्ट में एजी भी आ चुके थे। एजी का
सीजे बेंच में UPTET 2017 केस लगा हुआ था इसीलिए देर में आए और आते ही 5 मिनट तक बहस करते हुए जज साहब को एग्री कर लिया कि आप सिंगल बेंच के ऑर्डर पर स्टे दें जिस पर विपक्षी के वकील ने विरोध किया तो जज साहब ने लंच के बाद पुनः केस 2:00 बजे लगा। जैसे ही सुनबाई पुनः शुरू हुई एजी ने बहस करते हुए विपक्ष के सभी वकीलों को चुप कर दिया। उसके बाद उपेंद्र मिश्रा शुरू हुए लेकिन जज साहब उनकी बातों से असहमत दिखे अतः 10 मिनट बाद मिश्रा जी बैठ गए। एच एन सिंह का नंबर आया तो उन्होंने पुनः आनंद कुमार यादव केस से शुरुआत की और हाई स्कूल इंटर ग्रेजुएशन बीटीसी आदि सभी मुद्दों पर बहस करते करते B.ed को बाहर कराने पर बहस करने लगे जिस पर असहमत दिखे और सबमिशन पूरा कर बैठ गए परिहार सर ने 2 मिनट का समय लिया उसके बाद डॉ एल पी मिश्रा जी ने बहस प्रारंभ की जिस पर जज साहब ने कहा कि आपके पास अगर कोई नया तथ्य है तो कोर्ट के सामने रखें एलपी मिश्रा जी ने कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए बताया की कटऑफ बहुत हाई लगाई गई है इससे सभी शिक्षामित्र बाहर हो रहे है जिस पर महाधिवक्ता महोदय ने जोरदार अरगुमेंट किया जिस पर एल पी मिश्रा जी फाइल पटक दिया और कहने लगे स्टेटस को कर दिया जाए लेकिन महाधिवक्ता महोदय और सीनियर अधिवक्ताओं की फौज ने स्टे की मांग की और आज आर्डर रिजर्व करने की बात कही गई

जस्टिस महोदय ने ऑर्डर रिजर्व कर लिया है अंतरिम राहत की मांग की गई है* ऑर्डर 3 तरीके से आ सकता है

1. स्टे

2. सिंगल बेंच में जितने शिक्षामित्र याची बने थे उतनी सीटे छोड़ कर 9097 पर रिजल्ट जारी कर देना

3. स्टेटस को

 69000 teachers recruitment case

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