बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में तकनीकी के जरिए शिक्षा में सुधार की कवायद

बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में नए वर्ष में तकनीकी के जरिए शिक्षा में सुधार की कवायद चल रही है। परिषदीय स्कूलों में लर्निग आउटकम, अकादमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) और निष्ठा, आओ अंग्रेजी सीखें के जरिए पठन-पाठन में सुधार की उम्मीद है जबकि माध्यमिक स्कूलों में स्मार्ट और वचरुअल कक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों के शिक्षा में सुधार की संभावना है।

माध्यमिक विद्यालयों में छात्र-छात्रओं को विषयों की जानकारी देने के मकसद से स्मार्ट और वचरुअल कक्षाएं शुरू की जा रही हैं। स्मार्ट कक्षाएं तो कई विद्यालयों में शुरू हो गई हैं, लेकिन वचरुअल कक्षाओं की शुरुआत कुछ स्कूलों में ही हो सकी है। नए साल में वचरुअल कक्षाओं को ज्यादा से ज्यादा विद्यालयों में शुरू करने पर जोर होगा। स्मार्ट क्लासेज में शिक्षक प्रोजेक्टर में स्लाइड लगाकर पढ़ाते हैं, जबकि वचरुअल कक्षाओं में सीडी अथवा पेनड्राइव से टीवी स्क्रीन पर पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। वहीं, तहसील स्तर पर नोडल विद्यालय चिह्नित करके शिक्षा में नवाचार एवं गुणवत्ता संवर्धन का भी प्रयास किया जा रहा है। सीसीटीवी कैमरों से युक्त शिक्षण कक्षों को डीआइओएस कार्यालय में मॉनीटरिंग सर्वर कक्ष से जोड़ने की कवायद तेजी से चल रही है। जीआइसी में हंिदूी विभाग के वरिष्ठ शिक्षक डा. प्रभाकर त्रिपाठी बताते हैं कि वचरुअल कक्षाओं में बच्चों से लाइव बातचीत भी की जा सकती है।

परिषदीय स्कूलों में लर्निग आउटकम परीक्षा में चिन्हित कमजोर विद्यार्थियों को अंग्रेजी, गणित और विज्ञान विषयों के लिए उपचारात्मक कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इसके लिए प्रत्येक विकास खंड से 20 स्कूल चयनित किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों को विशेष सपोर्टिग के लिए चयनित 56 अकादमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। स्कूल खुलने पर एआरपी विद्यालयों में सपोर्टिग का काम शुरू कर देंगे। 49 और एआरपी के चयन के लिए मंगलवार को विज्ञापन जारी किया गया है। निष्ठा कार्यक्रम के तहत सभी सेवारत शिक्षकों की ट्रेनिंग दिलाने की तैयारी भी अंतिम चरण में है। यह प्रशिक्षित शिक्षक तकनीकी के जरिए बच्चों को इस तरह पढ़ाएंगे, जिससे वह विषयों को आसानी से समझकर ग्रहण कर सकें। आओ अंग्रेजी सीखें कार्यक्रम के तहत आल इंडिया रेडियो के सहयोग से विद्यालयों में 120 एपीसोड चलाया जा रहा है।

वचरुअल कक्षाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए जनवरी महीने में गंगापार, यमुनापार और शहर के विद्यालयों के प्रधानाचार्यो की बैठकें बुलाई जाएंगी। पाठ्यक्रमों के पूरा होने के संबंध में जानकारी के लिए निरीक्षण भी किया जाएगा। -आरएन विश्वकर्मा, डीआइओएस

लर्निग आउटकम, एआरपी और निष्ठा के जरिए कमजोर बच्चों में भी काफी सुधार होगा। ऐसे बच्चों के लिए उपचारात्मक कक्षाएं चलाई जाएंगी। 49 और एआरपी के चयन के लिए विज्ञापन जारी कर दिया गया है। – संजय कुमार कुशवाहा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

उच्च और तकनीकी शिक्षा में मिलेगा नया मुकाम

उच्च और तकनीकी शिक्षा में भी वर्ष 2020 में तमाम उम्मीदें हैं। प्रयागराज को नया मुकाम मिलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इविवि समेत तमाम संस्थानों को नए साल में शिक्षक और शिक्षणोत्तर कर्मचारी मिल जाएंगे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय और मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में शिक्षकों का लंबे समय से टोटा था। अतिथि प्रवक्ता ही खेवनहार बने थे। नियुक्ति की प्रकिया शुरू होने से उम्मीदों के बादल पर छाए धुंध हट गए हैं। इसके अलावा इन दोनों संस्थानों को नए वर्ष में हॉस्टल भी मिल जाएंगे। इससे बाहर रहने की समस्या भी खत्म हो जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.