दो साल में उच्चतर आयोग व चयन बोर्ड पुरानी भर्तियां पूरा करने में जुटे रहे

उप्र लोकसेवा आयोग को छोड़ दें तो अन्य भर्ती संस्थाओं की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। करीब दो साल में उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग उप्र और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र ने शिक्षकों की कमी के बाद भी नई भर्ती के लिए कदम नहीं बढ़ाए। पूरे समय पुरानी भर्तियों को ही पूरा करने की कोशिश जारी रही। शायद यही वजह है कि योगी सरकार उप्र शिक्षा चयन आयोग गठन की दिशा में बढ़ी है। प्रतियोगी दोनों संस्थाओं के कामकाज से खुश नहीं थे, अब सभी की निगाहें नए आयोग पर टिकी है। उसे भर्तियों की चाल बदलनी होगी।

मुख्यमंत्री योगी ने सत्ता में आने के बाद उच्चतर आयोग व चयन बोर्ड का विलय करने की योजना बनाई थी। उसके लिए कमेटियों का भी गठन हुआ, प्रक्रिया आगे बढ़ने के पहले ही दोनों भर्ती संस्थाओं के अध्यक्ष व अधिकांश सदस्यों ने त्यागपत्र दे दिया था, तब सरकार ने उनका पुनर्गठन कर दिया था। उच्चतर आयोग ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में विज्ञापन 46 के शेष विषयों के इंटरव्यू कराए और विज्ञापन 47 में 1150 पदों की लिखित परीक्षा के बाद अब साक्षात्कार कराया जा रहा है। इसी तरह से विज्ञापन 48 में प्राचार्य भर्ती के लिए अभी परीक्षा नहीं हुई है। उच्चतर से नई भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं हुआ है।

चयन बोर्ड ने वर्ष 2011 की प्रवक्ता व प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक भर्ती के साक्षात्कार कराए और वर्ष 2013 में जिन प्रकरणों में कोर्ट से निर्देश मिला उसमें संशोधित परिणाम जारी किए। अब वर्ष 2016 की पीजीटी-टीजीटी भर्ती के लिए साक्षात्कार शुरू होने जा रहे हैं। चयन बोर्ड ने भी 2018 व 2019 में कोई नई भर्ती के लिए आवेदन नहीं लिया है। पिछले वर्ष जिलों से ऑनलाइन अधियाचन लिया गया, लेकिन अब उन पदों की जांच टॉस्क फोर्स से कराई जा रही है। विज्ञापन कब जारी होगा तय नहीं है। वहीं, प्राथमिक स्कूलों की 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती अधर में है। प्रतियोगियों में भर्ती संस्थाओं के पुनर्गठन के बाद उम्मीद जगी थी कि तेजी से चयन व नियुक्तियां होंगी, उसमें दोनों संस्थाओं ने निराश किया है। प्रतियोगी पवन कुमार कहते हैं कि उच्चतर में माह में मात्र दस दिन साक्षात्कार हो रहा है, यह कब पूरे होंगे? ।

 

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