जिले के शिक्षकों ने प्रान के लिए किया आवेदन

जिले के आधे शिक्षकों ने प्रान (परमानेंट रिटायरमेंट एकाउंट नंबर) के लिए आवेदन किया है। उनकी पेंशन से प्रतिमाह इसकी कटौती भी होती है, लेकिन छह माह से उनके खाते में किसी प्रकार की धनराशि नहीं पहुंची। अधिकारियों का दावा है कि शासन की ओर से धन न मिलने के कारण शिक्षकों के खाते में अकेले उनकी धनराशि नहीं पोस्ट की जा सकती, ऐसे में वह धन के इंतजार में हैं।

शासन की ओर से पुनानी पेंशन योजना बंद कर दी गई है। वह कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना शुरू कर सभी को इसे अपनाने के लिए कहा जा रहा है। जिले में तैनात 3404 शिक्षकों में से 1721 ने नई पेंशन योजना के लिए आवेदन भी किया है, लेकिन उनके प्रान खाते में करीब छह माह से कोई धनराशि नहीं भेजी जा रही है। ऐसे में आवेदन करने वाले शिक्षक परेशान है। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इस संबंध में किसी भी तरह की जानकारी के लिए लेखा अधिकारी से करने की बात कही। वहीं, वित्त एवं लेखा अधिकारी देव कुमार ने बताया कि शिक्षकों के प्रान खाते में अप्रैल तक धनराशि भेजी गई है। इसके बाद शासन की ओर से बजट नहीं मिला।

क्या है प्रान

शासन की ओर से पुरानी पेंशन योजना बंद कर दी गई है। अब कर्मचारियों को नई पेंशन योजना के तहत आवेदन करना पड़ रहा है। इसके लिए शिक्षकों के मूल वेतन से 10 फीसद की कटौती की जाती है। जो उनकी वरिष्ठता क्रम के अनुसार चार से साढ़े पांच हजार के करीब होती है। यह धन राशि शिक्षकों के प्रान खाते में भेजी जाती है। वहीं, सरकार की ओर से शिक्षकों के प्रान खाते में मूल वेतन का 14 फीसद अंशदान के रूप में भेजा जाता है। यह धनराशि सेवानिवृत्त होने के बाद शिक्षकों को मिलेगी। जिससे उनका गुजारा होगा।

शिक्षक मांग रहे पुरानी पेंशन

शासन ने नई पेंशन योजना भले ही लागू कर दी हो, लेकिन शिक्षक संगठन पुरानी पेंशन योजना की मांग कर रहे हैं। इसके लिए वह लंबे समय से हड़ताल भी कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों को लेकर अब तक शासन ने कोई फैसला नहीं किया। जबकि पुरानी पेंशन योजना के स्थान पर नई पेंशन योजना के लिए आवेदन करने का दबाव शिक्षकों पर बनाया जा रहा है।

प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष मुलायम सिंह ने कहा कि शिक्षकों को किसी कीमत पर नई पेंशन योजना मंजूर नहीं है। वह पुरानी पेंशन योजना के लिए लगातार विरोध जता रहे हैं। कहा कि जिन शिक्षकों ने आवेदन किया है उनसे जबरन अधिकारियों ने इसके लिए स्वीकृत ली है। इसके लिए उनका वेतन रोकने और प्रताड़ित करने से भी अफसर नहीं चूके।

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