स्कूलों में दो सालों में हुए निर्माण की जांच होगी

सरकारी स्कूलों में निर्माण कार्य के नाम पर हेराफेरी करने वालों की अब खैर नहीं। बीते दो वर्षों में समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) व बेसिक शिक्षा निदेशालय द्वारा किए गए निर्माण कार्यों की जांच होगी। इस सबंध में जिलेवार अधिकारियों का आवंटन कर दिया गया है। जांच टीमों को अपनी रिपोर्ट 24 दिसम्बर तक राज्य परियोजना निदेशालय में भेजनी है।

इन अधिकारियों को कम्पोजिट स्कूल ग्रांट में 500 या इससे ज्यादा की छात्र संख्या वाले स्कूलों की जांच करनी होगी। यदि जिलों में ऐसे स्कूल कम हो तो 200 छात्र संख्या वाले स्कूलों का चयन करना होगा। 3 विकास खण्डों से कम से कम 20 स्कूलों की जांच होगी। यदि स्कूल में कम्पोजिट स्कूल ग्रांट के साथ फर्नीचर, हैण्डपम्प, विद्युतीकरण, चारदीवारी, विज्ञान किट, स्पोर्ट्स ग्रांट, पुस्तकालय ग्रांट भी दी गई हो तो इसकी भी जांच की जाएगी। वहीं इसके लिए हुई टेण्डर प्रक्रिया की भी जांच होगी।

जांच टीम यह भी देखेगी कि मुख्यालय से भेजी गई धनराशि का समयसीमा में उपयोग हुआ? यदि नहीं हुआ तो इसके लिए दोषी कौन-कौन है? धनराशि का उपयोग नहीं हुआ तो उसे कहां संरक्षित किया गया है? जितनी धनराशि खर्च की गई है उससे कितने काम हुए और उनकी गुणवत्ता कैसी है। जांच टीम में डायट प्राचार्य के साथ एक अवर अभियंता को रखा गया है। जिन जिलों में जांच के लिए अधिकारी नामित किये गये हैं बांदा, बाराबंकी, झांसी, मुरादाबाद, सीतापुर, बुलंदशहर, गोण्डा, अम्बेडकर नगर, कानपुर देहात, हापुड़, सुलतानपुर, गोरखपुर, कौशाम्बी, महोबा, फतेहपुर और देवरिया। इन जिलों में जांच 11 से 21 दिसम्बर तक होगी।

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