अनिवार्य शिक्षा कानून की संशोधित धारा से शिक्षामित्रों को संजीवनी

इलाहाबाद : केंद्र सरकार द्वारा अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 की धारा 23 (2) किए गए संशोधन से शिक्षामित्रों को संजीवनी मिलती नजर आ रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के संशोधित कानून पर अपनाए गए रुख से सहायक अध्यापक पर समायोजित हुए शिक्षामित्रों को अगले चार साल में पद की योग्यता हासिल करने का मौका मिल सकता है। शिक्षामित्रों के अधिवक्ता केएस कुशवाहा का कहना है कि संशोधित कानून संसद से पास हो चुका है। 31 मार्च, 2015 को कार्यरत प्राइमरी स्कूलों सहायक अध्यापक अगले चार साल में पद की योग्यता हासिल कर सकेंगे।

सपा शासन में शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किया था शिक्षामित्रों को इस संशोधित कानून का लाभ मिलेगा। अगर यह कानून संसद में पारित होता है तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रभावी होगा। अगले चार साल में शिक्षामित्र टीईटी व अन्य योग्यताएं हासिल कर सकेंगे। अगर शिक्षामित्र वर्ष 2021 तक योग्यता हासिल ना कर सके तो वो सेवा से बाहर हो जाएंगे। केंद्र सरकार के इस कदम से शिक्षामित्रों को पद पर बने रहने का अवसर मिल सकता है। फिलहाल न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा से स्थिति स्पष्ट करते हुए दो फरवरी तक हलफनामा मांगा है।compulsory education law

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