वजीफे के फेर में बढ़ी बीएड बीटीसी कालेजों की परेशानी

वजीफे के फेर में बीएड एवं बीटीसी कालेजों की परेशानी बढ़ गई है। इनमें बीएड के अनुसूचित जाति के छात्र-छात्रओं को फ्री में एडमीशन करना पड़ता है। ये विद्यार्थी परीक्षा शुल्क भी नहीं देते। वजीफा मिलने पर ही स्कूल संचालक को इनका प्रवेश शुल्क मिल पाता है। यदि विद्यार्थी फेल हो जाते हैं तो उन्हें वजीफा नहीं मिल पाता। ऐसे में विद्यार्थी भी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते और वे छोड़कर चले जाते हैं। इसके साथ ही वजीफे में और कई परेशानियां हैं।

गत वर्ष जिले में बीएड के एक भी विद्यार्थी का वजीफा नहीं आया। इससे कालेज संचालकों को समस्याओं का सामना करना पड़ा। जिले में बीएड एवं बीटीसी संस्थान की संख्या लगभग 100 के करीब है। इनमें से लगभग सात हजार छात्र छात्रओं ने वजीफे के लिए गत वर्ष आवेदन किया था। इनमें से किसी का भी वजीफा नहीं आया। इससे कालेज संचालकों को शिक्षकों का मानदेय देने में परेशानी उठानी पड़ी। पं.सदाशिव शिक्षण संस्थान के प्रबंधक श्याम शंकर उपाध्याय बताते हैं कि गत वर्ष बीएड के 75 छात्र-छात्रओं ने वजीफे का फार्म भरा था। इनमें से एक का भी वजीफा नहीं मिल सका। बीटीसी में 46 में से 12 विद्यार्थियों का ही वजीफा आया था। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देश के अनुसार बीएड में अनुसूचित जाति को शून्य पर एडमीशन कराया जाता हैं। यहां तक कि परीक्षा शुल्क भी वे नहीं देते। इस वर्ष बीएड में 100 में से 16 एससी समेत 90 ने आवेदन किया है।

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मैनाथी कुंवर डिग्री कालेज के प्रधानाचार्य डॉ.एसके सिंह बताते हैं कि गत वर्ष बच्चे आनलाइन आवेदन किए थे, लेकिन वजीफर नहीं मिल सका।

अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों का फ्री में करना पड़ता है प्रवेश, गत वर्ष बीएड के किसी विद्यार्थी का नहीं आया वजीफा

वजीफे के लिए आनलाइन आवेदन करने के बाद डीआइओएस कार्यालय से उसे फारवर्ड किया जाता है। इसके बाद समाज कल्याण विभाग से उसे फारवर्ड कर शासन को भेजा जाता है। वहीं से बच्चों को वजीफा भेजा जाता है। -राजीव कुमार,

जिला समाज कल्याण अधिकारी

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