विद्यालयों में पढ़ाई शुरू होने तक पंचायतों में टीवी पर चलेगी क्लास

नई दिल्ली: कोरोना काल में बच्चों को घर बैठे पढ़ाने के लिए शुरू हुई आनलाइन शिक्षा को सभी की पहुंच में लाने के लिए शिक्षा मंत्रलय से जुड़ी संसद की स्थायी समिति ने शुक्रवार को सरकार को एक अहम सुझाव दिया है। जिसमें कहा गया कि जब तक कोरोना संक्रमण की स्थिति सामान्य नहीं होती और स्कूल नहीं खुलते तब तक बच्चों को आनलाइन पढ़ाने के लिए सभी ग्राम पंचायतों में एक बड़ा टेलीविजन लगाया जाए। जिसे खुली जगह या फिर किसी बड़े सभागार में लगाया जाए। जहां स्मार्ट फोन या टीवी से वंचित बच्चे निर्धारित समय पर आकर अपनी पढ़ाई कर सकें।

शिक्षा मंत्रलय की इस संसदीय समिति ने इस दौरान दिव्यांग बच्चों का भी ख्याल रखने का सुझाव दिया। खास बात यह है कि समिति ने आनलाइन शिक्षा को लेकर यह पहल तब की जब हाल ही में आई रिपोर्ट में यह सामने आया कि सिर्फ तीस फीसद बच्चों के पास ही स्मार्ट फोन या इंटरनेट जैसी सुविधाएं हैं। ऐसे में बाकी बच्चों की पढ़ाई नहीं हो रही है।

समिति ने इसके बाद ही मंत्रलय से आनलाइन पढ़ाई से जुड़ा पूरा ब्योरा तलब किया। जिसके बाद आनलाइन पढ़ाई में ढिलाई दिखाने वाले आधा दर्जन राज्यों को पहले चरण में तलब भी किया। आने वाले दिनों में कुछ और राज्यों को भी इस मामले में तलब किया जाएगा।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और संसदीय समिति के अध्यक्ष डाक्टर विनय सहस्रबुद्धे की अगुवाई में हुई इस बैठक में समिति ने आनलाइन शिक्षा को सभी तक पहुंचाने के लिए सेटेलाइट चैनेल की सुविधा का इस्तेमाल करने का भी सुझाव दिया। साथ ही इसरो और प्रसार भारती से भी इस पर राय ली। खास बात यह है कि इसरो की मदद से शिक्षा के लिए सेटेलाइट चैनेल की सुविधा मुहैया कराई जाती है। आनलाइन शिक्षा को लेकर ढिलाई दिखाने के मामले में तलब किए उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश और तेलंगाना से जानकारी ली गई। उनसे पूछा गया कि वे सेटेलाइट चैनेल की सुविधा का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहे हैं। इस पर राज्यों ने भरोसा दिया, कि वे जल्द ही इसे शुरू करेंगे।

2022 में परीक्षा न होने पर नए पैटर्न से होगा मूल्यांकन
समिति ने इस दौरान शिक्षा मंत्रलय से 2022 की परीक्षा तैयारियों को लेकर भी सवाल पूछा। जिस पर मंत्रलय ने बताया कि स्थिति सामान्य रही तो परीक्षाएं होंगी। बावजूद इसके इस बार मूल्यांकन की एक नई प्रक्रिया पर काम हो रहा है, जिसे परीक्षा न होने की स्थिति में इस्तेमाल में लाया जाएगा। इसे पहले से ही तैयार रखा जाएगा, ताकि बाद में भ्रम की स्थिति पैदा न होने पाए। इसके प्रयास तेज किए जाएं