अभ्यर्थियों ने रोजगार के लिए बुलंद की आवाज

असिस्टेंट प्रोफेसर पद के खाली पदों को भरने के लिए अधियाचन जारी न होने पर प्रतियोगी छात्रों में नाराजगी बढ़ गई है। वह अधियाचन जारी न होने के पीछे छात्र अधिकारियों की दिशाहीन नीति व निदेशालय में व्याप्त भ्रष्टाचार को प्रमुख कारण मान रहे हैं। विरोध में प्रतियोगी छात्रों ने गुरुवार को उच्च शिक्षा निदेशालय पर आवाज बुलंद किया। वक्ताओं ने निदेशालय में ईमानदार कार्यपद्धति लागू करते हुए नई भर्ती के लिए अधियाचन जारी करने की पुरजोर मांग की।

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कॉलेजों में अलग-अलग विषयों के चार हजार के लगभग पद खाली हैं। खाली पद भरने के लिए निदेशालय को जुलाई में विज्ञापन संख्या 50 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 2500 पदों का अधियाचन जारी करना था। लेकिन, जनवरी 2020 शुरू होने के बाद भी अधियाचन जारी नहीं हुआ।

सौरभ राय, रामसेवक, वीरेंद्र आदि प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने व युवाओं को रोजगार देने की बात करती है। लेकिन, डिग्री कॉलेजों में खाली पदों को भरने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है। जब कॉलेज में शिक्षकों की भर्ती ही नहीं होगी तो पढ़ाई कैसे दुरुस्त होगी और युवाओं को रोजगार कहां से मिलेगा? इस पर विचार करने को कोई तैयार नहीं है।

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