स्कूलों को गोद ले सकेंगे ट्रस्ट और जनप्रतिनिधि पर नहीं बदल सकेंगे नाम

लखनऊ : परिषदीय विद्यालयों का जीर्णोद्धार और विकास करने के लिए संस्थाएं, ट्रस्ट और जनप्रतिनिधि अब उन्हें गोद तो ले सकेंगे, लेकिन स्कूल का नाम नहीं बदला जाएगा। विद्यालय का जीर्णोद्धार जिनकी स्मृति में कराया जाएगा, उनके नाम की अलग शिला पट्टिका क्लासरूम के बाहर और विद्यालय परिसर के अंदर लगायी जा सकेगी। जीर्णोद्धार के बाद विद्यालय में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से स्वीकृत पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जाएगा। विभागीय योजनाओं व कार्यक्रमों को विभाग के निर्देशानुसार संचालित करने में कोई व्यवधान नहीं होगा।

परिषदीय विद्यालयों को गोद लेने की प्रक्रिया और शर्तें तय करते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने बुधवार को इस बारे में शासनादेश जारी कर दिया है। जीर्णोद्धार के बाद विद्यालय की परिसंपत्तियों पर शिक्षा विभाग का ही स्वामित्व रहेगा। विद्यालय में तैनात शिक्षकों, शिक्षामित्रों पहले की तरह काम करते रहेंगे। उनकी नियुक्ति, स्थानांतरण, पदोन्नति आदि सभी कार्य पहले की तरह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के अधीन रहेंगे। बीएसए सिर्फ ऐसे ही विद्यालयों को गोद लिये जाने का प्रस्ताव करेंगे जो जीर्ण-शीर्ण हों। साक्ष्य के तौर पर विद्यालय परिसर के साथ अपनी फोटो और विद्यालय के पुनर्निर्माण/मरम्मत का प्रस्ताव भेजेंगे। यदि कोई संस्था या ट्रस्ट किसी पूर्ण विकसित स्कूल को मॉडल स्कूल बनाने के उद्देश्य से गोद लेना चाहता है तो बेसिक शिक्षा अधिकारी उस पर विचार करेंगे।

जीर्णोद्धार करने वाली संस्था का विद्यालय या उससे जुड़े शैक्षिक व गैर शैक्षिक स्टाफ पर किसी प्रकार का कोई दावा नहीं होगा। विद्यालय का मूल स्वरूप किसी भी दशा में प्रभावित न हो। पढ़ाई के अलावा विद्यालयों का इस्तेमाल किसी अन्य प्रयोजन के लिए नहीं किया जाएगा। शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन किसी भी दशा में नहीं किया जाएगा। किसी परिषदीय विद्यालय को गोद लेने की इच्छुक संस्था/ट्रस्ट/जनप्रतिनिधि या कोई व्यक्ति बीएसए को औचित्य सहित लिखित अनुरोध पत्र देगा। बीएसए इसका परीक्षण करने के बाद उसे जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति के समक्ष रखेंगे। जिला समिति की सिफारिश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय समिति निर्णय लेगी। राज्य स्तरीय समिति के निर्णय के बाद बीएसए विद्यालय को गोद लेने के बारे में आदेश जारी करेंगे।

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