नियमावली दरकिनार कर शिक्षकों का पारस्परिक अंतर जिला तबादला किया गया

अंतर जिला तबादला बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों का अधिकार नहीं है, बल्कि स्थानांतरण का निर्णय शासन करता है। शिक्षकों का कॉडर नियुक्ति वाले जिले तक ही सीमित है, दूसरे जिले में जाने पर वे अपनी वरिष्ठता खो देंगे। साथ ही जाने वाले जिले में यदि उनके बैच के शिक्षक पदोन्नत नहीं हो सके हैं तो वे अपनी पदोन्नति भी खो देंगे। इतना ही नहीं हाल की ही 68500 शिक्षक भर्ती में तो स्पष्ट प्रावधान है कि शिक्षकों का अंतर जिला तबादला भविष्य में नहीं होगा।’

उक्त नियम, नसीहत और निर्देश परिषद के अफसर उन शिक्षकों को बताते आ रहे हैं, जो अंतर जिला तबादला के लिए उनकी चौखट पर पहुंचते रहे हैं। इसके उलट वही अफसर मन मर्जी के तहत अंतर जिला तबादले धड़ाधड़ कर रहे हैं। कुछ दिन पहले तक हाईकोर्ट की आड़ लेकर कई शिक्षकों को मनचाही तैनाती दी जा चुकी है। अब दो शिक्षकों का पारस्परिक अंतर जिला तबादला किया गया है। बदायूं के प्राथमिक शिक्षक प्रवीन सारस्वत का आगरा और आगरा के सहायक अध्यापक अरशद अली का बदायूं तबादला हुआ है। उप्र बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली के तहत शिक्षकों का अंतर जिला तबादला हो सकता है लेकिन, पारस्परिक स्थानांतरण का नियम ही नहीं है, क्योंकि दोनों का कॉडर अलग है। इसके बाद भी तबादला आदेश परिषद सचिव की ओर से कोर्ट के आदेश का हवाला देकर किया गया है।

ज्ञात हो कि शासन की ओर से संयुक्त सचिव ममता श्रीवास्तव ने 20 जुलाई 2018 को जिले के अंदर समायोजन व पारस्परिक स्थानांतरण का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने इसे सही न मानते हुए खारिज कर दिया, जबकि जिले के अंदर शिक्षकों का ग्रामीण से ग्रामीण व नगर से नगर में आसानी से स्थानांतरण हो सकता था, क्योंकि दोनों का कॉडर समान था। इसके बाद भी अंतर जिला पारस्परिक तबादले से शिक्षक हैरान हैं।

आदेश को पहले नकारा, अब स्वीकारा : अंतर जिला तबादले की सूची 13 जून को जारी हुई। इसमें 31513 शिक्षकों ने ऑनलाइन आवेदन किए। 11963 शिक्षकों का तबादला हुआ और 19550 शिक्षक निराश हुए। करीब 800 से अधिक ऐसे शिक्षकों ने कोर्ट में तबादले के लिए गुहार लगाई जो दिव्यांग, गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। परिषद ने जवाब दिया कि बीच सत्र में तबादले नहीं कर सकते, जो आदेश हुए वे पारदर्शी तरीके से किए गए। अब उनमें से चुनिंदा शिक्षकों को नियुक्ति दी जा रही है।

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