यूपी के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रों को प्रमोट करने के फॉर्मूले पर मंथन

यूपी के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की परीक्षाएं निरस्त कर दी गयी है. यूपी के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया. वार्षिक और सेमेस्टर प्रणाली वाले पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों को परीक्षाएं कराए बगैर अगली कक्षाओं और अगले सेमेस्टर में प्रमोट करने का फॉर्मूला बनाने पर मंथन चल रहा है. मुख्यमंत्री के आवास पर हुई बैठक में कोई शासनादेश जारी नहीं हो सका. कमेटी के प्रस्तावों के आधार पर उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी कोई सर्वमान्य तरीका निकलने में लगे है. परीक्षाओं के संबंध में गठित चार कुलपतियों की कमेटी ने परीक्षाएं निरस्त कर छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत करने की सिफारिश की थी. कुलपतियों की कमेटी ने वार्षिक व सेमेस्टर प्रणाली के तहत होने वाली परीक्षाओं के संबंध में अपनी स्पष्ट राय दी है.

यह हैं सुझाव
आंतरिक मूल्यांकन और पिछली कक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर छात्रों को प्रोमोट किया जा सकता है. लेकिन इसमें में भी एक पेंच फसेगा. प्रदेश के कुछ विश्वविद्यालयों और उससे सम्बंधित कॉलजों में कुछ सब्जेक्ट परीक्षाएं हो चुकी है. ऐसे में एक प्रस्ताव यह भी है कि जिन सब्जेक्टों की परीक्षा संपन हो चुकी है, उन उत्तरपुस्तिकों का मूल्यांकन करा लिया जाए. लेकिन कोरोना संकरण की वजह से उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराना भी आसान नहीं है. इसका शिक्षक कुछ विरोध कर रहे है. ऐसी स्थिति में केवल पिछली कक्षा या सेमेस्टर में प्राप्त नम्बरों के आधार पर ही अंक देकर अगली कक्षा या सेमेस्टर में प्रमोट करना होगा. लास्ट ईयर के छात्रों को पिछले दो सालो की परीक्षा में प्राप्त नंबर के औसत के आधार पर अंक दिए जा सकते हैं. प्रथम वर्ष के छात्रों को ऐसे ही प्रमोट किया जा सकता है, उनके अंकों का निर्धारण द्वितीय वर्ष में मिलने वाले अंकों के आधार पर किया जा सकता है. ऐसी संभावना है कि एक-दो दिनों में विभाग किसी नतीजे पर पहुंच जाएगा.

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