परिषदीय स्कूलों के बच्चों को किताबें, यूनीफॉर्म, बैग और जूते-मोजे देने का मामला

लखनऊ: सीएम योगी आदित्यनाथ ने परिषदीय स्कूलों के सभी बच्चों को जुलाई में पाठ्यपुस्तकें, यूनीफॉर्म, जूते-मोजे और स्कूल बैग मुहैया कराने का निर्देश दिया हो लेकिन, basic shiksha vibhag up के ट्रैक रिकार्ड को देखकर उनके फरमान पर अमल मुश्किल लगता है। अतीत को देखते हुए परिषदीय स्कूलों के बच्चों को मुख्यमंत्री की मंशा के मुताबिक जुलाई में सरकार की यह सौगातें मुहैया करा पाना विभाग के लिए टेढ़ी खीर होगी।

परिषदीय स्कूलों के बच्चों को सरकार की ओर से नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें, यूनीफॉर्म मुहैया कराई जाती रही हैं। आलम यह है कि पिछले दो शैक्षिक सत्रों के दौरान जुलाई तो क्या अगस्त-सितंबर तक बच्चों को नई किताबें नहीं मिल पाई। कक्षा पास करने वाले बच्चों से पिछले सत्र की किताबें इकट्ठा कराकर नए सत्र में उन्हें बच्चों को सौंपकर शुरुआती महीनों में काम चलाया गया। इस साल भी किताबों की छपाई की खातिर प्रकाशकों के चयन के लिए फाइनेंशियल बिड नहीं हो पाई है। बच्चों को सरकार की ओर से हर सत्र में दो सेट यूनीफॉर्म भी उपलब्ध कराई जाती है।

नए सत्र में बच्चों को समय से यूनीफॉर्म मुहैया करा पाना बेसिक शिक्षा विभाग के लिए कठिन चुनौती रही है। हकीकत यह है कि पिछले दो सत्रों में दिसंबर में ठंड शुरू होने तक विभाग सभी बच्चों को यूनीफॉर्म का वितरण नहीं कर पाया। इस बार तो चुनौती इसलिए ज्यादा है क्योंकि सीएम ने यूनीफॉर्म का रंग बदलने का निर्देश दिया है। बेसिक शिक्षा विभाग अभी तक यूनीफॉर्म का रंग भी तय नहीं कर पाया है। स्कूल बैग वितरण के मोर्चे पर भी बेसिक शिक्षा विभाग का रिपोर्ट कार्ड ठीक नहीं रहा है। बच्चों को स्कूल बैग देने का फैसला अखिलेश सरकार ने 2015-16 में किया था। उस वित्तीय वर्ष के अनुपूरक बजट में सरकार ने इसके लिए प्रावधान किया था। यह बात और है कि वित्तीय वर्ष बीत जाने पर भी स्कूल बैग खरीदने की प्रक्रिया तय नहीं हो पाई।

सपा सरकार के आखिरी साल में अखिलेश की फोटो लगे स्कूल बैग बांटने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने खूब हाथ-पैर मारा लेकिन कुछ ही जिलों में बच्चों को बैग मिल पाए। विस चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण स्कूल बैग वितरण कार्यक्रम पर ग्रहण लग गया। इस बार तो बेसिक शिक्षा विभाग पर बच्चों को जूते-मोजे और स्वेटर भी उपलब्ध कराने का दारोमदार है। विभाग ने प्रति बच्चा 150 रुपये की दर से जूते, 20 रुपये की दर से मोजे और 150 रुपये की दर से स्वेटर उपलब्ध कराने के लिए सरकार को बजट की जरूरत बताई है। खुद विभागीय अधिकारी मानते हैं कि बच्चों को तय समयसीमा में उनकी नाप के अनुसार जूते उपलब्ध करा पाना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

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