परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले मानसिक दिव्यांगों के लिए अंग्रेजी में पुस्तकें

बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ने वाले मानसिक दिव्यांग बच्चों को अंग्रेजी में पाठ्य पुस्तकें मिलेंगी। पुस्तकें अलग से डिजाइन और विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद उप्र (एससीईआरटी) ने यह कार्य आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान उप्र, प्रयागराज को सौंपा है।

परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के बच्चों के लिए बेसिक शिक्षा विभाग निरंतर किताबों में सुधार करा रहा है। मोबाइल एप के जरिए पढ़ाई कराने के अलावा प्रदेश की क्षेत्रीय भाषाओं भोजपुरी, बृज, बुंदेलखंड आदि में किताबें मुहैया करायी जा चुकी हैं। अब बारी इन स्कूलों में पढ़ने वाले मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों की है जिनके लिए एससीईआरटी के निर्देश पर आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान की ओर से प्राथमिक स्तर की अंग्रेजी पाठ्य पुस्तकें तैयार करायी जा रही हैं। तैयार होने वाली किताबों में लर्निग डिसेबिलिटी को ध्यान में रखा जाना है। इसके लिए संस्थान के अकादमिक सदस्य व भाषा विशेषज्ञों को लगाया गया है। तैयारी है कि नए शैक्षिक सत्र में बच्चों को खास प्रकार की किताबें मुहैया हो जाएं।

विशिष्ट संस्थाएं भी देंगी सहयोग : मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए किताबें तैयार करने में प्रदेश की विशिष्ट संस्थाओं के विशेषज्ञों का भी सहयोग लिया जा रहा है। इनमें भारतीय सेना की ओर से संचालित आशा स्कूल, डॉ. शकुंतला मिश्र राष्ट्रीय पुनर्वास विवि लखनऊ, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज व मनोविज्ञानशाला उप्र प्रयागराज शामिल हैं।

कौन होते हैं मानसिक दिव्यांग बच्चे : मानसिक रूप से दिव्यांग ऐसी स्थिति को कहते हैं, जिसमें व्यक्ति का मानसिक विकास सामान्य व्यक्ति की तुलना में धीमा होता है। वास्तविक उम्र बढ़ने के साथ उसकी मानसिक उम्र नहीं बढ़ती। ऐसा व्यक्ति समझने में सुस्त होता है और उसे दैनिक जीवन के आवश्यक विभिन्न कौशल या व्यवहार को सीखने में कठिनाई होती है। मानसिक दिव्यांग बीमारी नहीं बल्कि विकास संबंधी विकार है।

इस प्रकार का कार्य प्रदेश में पहली बार हो रहा है, जहां मानसिक दिव्यांग बच्चों के लिए अलग से पुस्तकें डिजाइन व विकसित की जा रही हैं। – स्कंद शुक्ल, प्राचार्य आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान, प्रयागराज