सरकारी स्कूलों में बंटने वाले एमडीएम पर बायोमीटिक मशीन का पहरा

अलीगढ़ सरकार ने जतन-दर-जतन किए कि स्कूलोंे में बच्चों को भोजन ठीक से मिल जाए लेकिन यह फेल हो गए। अब जिले में ऐसी पहल की गई है कि मध्याह्न भोजन (एमडीएम) में घोटाला संभव नहीं होगा। कक्षा एक से आठ तक के सरकारी स्कूलों में बंटने वाले एमडीएम पर बायोमीटिक मशीन का पहरा बिठा दिया है। इससे छात्र संख्या बढ़ाकर कम एमडीएम बांटने व ज्यादा का भुगतान पर रोक लग गई है। प्रदेशभर में अलीगढ़ ही इकलौता जिला है, जहां यह व्यवस्था की गई है। अब पूरे प्रदेश में लागू करने संबंधी प्रस्ताव शासन को भेजा है।

शुरुआती चरण में जिले के सभी 13 ब्लॉकों के पांच-पांच यानी कि कुल 65 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को चयनित किया है। भविष्य में बच्चों के एमडीएम खाने की गतिविधि को सीसी टीवी कैमरे में रिकॉर्ड करने की भी तैयारी है। स्कूली प्रबंध समिति स्कूल फंड से 2500-3000 रुपये की बायोमीटिक मशीन खरीदेगी। जिले में 1766 प्राइमरी व 733 जूनियर हाईस्कूल समेत कुल 2499 सरकारी स्कूल हैं। इनमें 2.11 लाख विद्यार्थियों को एमडीएम के तहत मेन्यू के अनुसार हर दिन खाना व फल वितरण किया जाता है। प्रयोग की सफलता के बाद इसे आगे बढ़ाने पर विचार होगा।

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