विद्यालयों में आधे सत्र में भी सबको नहीं मिलीं किताबें

  

इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल बनाने के प्रयोग बेमतलब साबित हो रहे हैं। नए शैक्षिक सत्र का आधा समय बीत रहा है, अब तक सभी स्कूलों में पुस्तकें नहीं पहुंच सकी हैं। विभागीय अफसरों की तय की गई पुस्तक वितरण की समय सारिणी का किताबें उपलब्ध न होने से अनुपालन नहीं हो सका है। कई जिलों में शहर व आसपास के इलाकों में वितरण करा दिया गया है, लेकिन ग्रामीण अंचलों में अब भी इंतजार है।

परिषद के एक लाख 45 हजार प्राथमिक व 45 हजार उच्च प्राथमिक विद्यालयों का शैक्षिक सत्र इस बार अप्रैल माह से शुरू हुआ था। पहले यह तैयारी की गई थी कि हर हाल में जुलाई के पहले पखवारे में सारी किताबें वितरित करा दी जाएं, लेकिन शिक्षा निदेशक बेसिक डॉ. सर्वेद्र विक्रम बहादुर सिंह ने मई में किताबों की आपूर्ति और वितरण के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वह हर हाल में किताबों की खरीद का आदेश तीन जून तक जारी कर दें।

आवंटित कार्य के सापेक्ष जिलों में पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति अनुबंध की तारीख से तीन माह के अंदर होगी। सभी वगोर्ं की किताबों के आपूर्ति की अंतिम तारीख 29 अगस्त तय हुई। हर जिले में पुस्तकों के वितरण का कार्य जिलाधिकारी की अध्यक्षता में करने का आदेश जारी हुआ। हालत यह है कि अब तक सभी स्कूलों को किताबें मुहैया नहीं हो सकी है। कहीं जिला मुख्यालय तक पहुंची हैं तो कहीं ब्लाक संसाधन केंद्रों पर ही डंप हैं। शिक्षकों को कहा गया है कि वह आकर ले जाएं। इलाहाबाद के ग्रामीण क्षेत्रों में कक्षा एक की कलरव पुस्तक का वितरण सभी स्कूलों में नहीं हुआ है। छमाही परीक्षा सिर पर है ऐसे में छात्र-छात्रओं को बिना पढ़े ही इम्तिहान देना होगा। इसी तरह का हाल यूनीफार्म वितरण का भी है।

एक समान समय सारिणी व कक्षावार टाइम टेबिल फेल : परिषद ने बीते छह अप्रैल को विद्यालयों में पढ़ाई कराने का शैक्षिक कैलेंडर जारी किया था। इसमें पहली बार सभी स्कूलों में एक समान समय सारिणी और कक्षावार टाइम टेबिल भेजा गया था, ताकि स्कूलों के निरीक्षण में अफसरों को पता रहे कि उनके यहां पर अब तक क्या पढ़ाया होगा। यह प्रयोग किताब व यूनीफार्म वितरण में देरी होने से हाशिए पर चला गया है।

पुस्तकों में त्रुटियों की भरमार परिषद के विद्यालयों में बांटी जा रही पुस्तकों में गलतियों की भी भरमार है। इस बार एससीईआरटी के निर्देश पर कक्षा एक से तीन तक की किताबों का पुनरीक्षण हुआ और किताबों में चित्र आदि का प्रयोग करके उसे बेहतर करने का प्रयास हुआ, लेकिन छपाई के कारण उस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कक्षा दो की पुस्तक के भलाई की जीत पाठ में बुराई शब्द में मात्र न लगने से वह बराई हो गई है। इसी तरह की हंिदूी, गणित व अंग्रेजी में भी तमाम त्रुटियां पकड़ी जा चुकी हैं।

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