बिना कोर्ट की सहमति के अधिकरण गठित करने पर रोक लगा दी

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा सेवा अधिकरण की विधायी प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करते हुए बिना कोर्ट की सहमति के अधिकरण गठित करने पर रोक लगा दी है। साथ ही हड़ताल कर रहे प्रयागराज व लखनऊ के वकीलों से काम पर वापस लौटने की अपील की है। कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश से कहा है कि वह शैक्षिक व गैर शैक्षिक स्टाफ के विचाराधीन मुकदमों के निस्तारण के लिए अतिरिक्त पीठें बनाएं। राज्य सरकार को बार एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करके शिकायतों के निवारण का प्रयास करने का निर्देश दिया है। जीएसटी अधिकरण के मुद्दे पर लखनऊ पीठ में सुनवाई के कारण कोई आदेश जारी नहीं किया है।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर व न्यायमूíत एसएस शमशेरी की खंडपीठ ने स्वत: कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण घोषित लाकडाउन में भी हाईकोर्ट में न्यायिक कार्य सुचारू रूप से चला। लेकिन, शिक्षा सेवा अधिकरण की पीठ स्थापित करने के मुद्दे को लेकर अधिवक्ता आंदोलन रत हैं। इससे न्यायिक कार्य निस्तारण में अवरोध उत्पन्न हुआ है।

लखनऊ के वकीलों ने वाहन रैली निकाली

लखनऊ: हाईकोर्ट की लखनऊ ख्ांडपीठ का क्षेत्रधिकार बढ़ाने व नए बनने वाले सभी न्यायाधिकरणों को राजधानी में स्थापित करने की मांग तेज करते हए अवध बार एसोसिएशन ने गुरुवार को भी न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है। बुधवार को अधिवक्ताओं ने वाहन रैली निकालकर अपने आंदोलन को मजबूती दी।

अवध बार के अध्यक्ष एचजीएस परिहार के नेतृत्व व महामंत्री शरद पाठक के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने हाई कोर्ट से 1090 चौराहे तक वाहन रैली निकाली। दूसरी ओर जस्टिस मोहम्मद फैज आलम खान ने बुधवार को जमानत मामलों में कैदी के पैरोकार को सुनना प्रारम्भ कर दिया। उन्होंने तीन मामलों में जमानत दी। पैरोकारों ने कहा था कि न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण उनके वकील बहस करने के लिए हाजिर नहीं हो रहे हैं, ऐसे में उन्हीं को सुन लिया जाए। जमानत पाए आरोपित विष्णु नारायण मिश्र, सत्यपाल यादव व मोहम्मद शादाब उर्फ तूती हैं। वे गैंगस्टर के आरोपित थे।

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