प्रदेश के अशासकीय कालेजों में आउटसोर्सिग की तैयारी

इलाहाबाद  प्रदेश भर के अशासकीय माध्यमिक कालेजों में अब आउटसोर्सिग से कर्मचारियों की नियुक्ति की तैयारी है। शासन ने इसका खाका भी खींच लिया है, उम्मीद है कि नए साल से इसे लागू किया जाएगा। सरकार कालेजों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की केंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत नियुक्ति कराएगी। उनके पारिश्रमिक का भुगतान शिक्षा निदेशक माध्यमिक व जिला विद्यालय निरीक्षक को करना होगा। सहायता प्राप्त माध्यमिक कालेजों में अनुचरों की नियुक्ति आउटसोर्सिग से करने की भनक लगने पर लाला बाबू बैजल मेमोरियल इंटर कालेज लोदीपुर गाजियाबाद ने हाईकोर्ट में स्पेशल अपील की। इस पर शासन ने कोर्ट में हलफनामा देकर पूरी योजना का विस्तार से खुलासा किया है। साथ ही इस आरोप को सिरे से खारिज किया है कि आउटसोर्सिग से कालेज के गोपनीय कार्य प्रभावित नहीं होंगे और उनकी नियुक्ति से सरकार पर व्ययभार भी नहीं पड़ेगा।

संवेदनशील कार्य अनुचर के जिम्मे नहीं: अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा संजय अग्रवाल ने हाईस्कूल व इंटर कालेजों में चौकीदार, फर्राश, सफाईकर्मी, विज्ञान कक्ष चपरासी, माली आदि पदों का जिक्र करते हुए कहा है कि यह कार्य संवेदनशील नहीं हैं। परीक्षा के प्रश्नपत्र आदि अनुचर की बजाय प्रधानाचार्य व शिक्षकों की निगरानी में होते हैं। इसके बाद भी इंगेज कार्मिक यदि कोई गड़बड़ी करता है तो व्यक्ति व संस्था पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

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नियुक्ति प्रक्रिया व ऐसे नियंत्रण होगा: चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों को केंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत राज्य सरकार की ओर से नामित संस्था उप्र लघु उद्योग निगम कानपुर को अधिकृत करने की तैयारी है। इस संस्था की ओर से मिलने वाले कार्मिकों को पारिश्रमिक भुगतान शिक्षा निदेशक माध्यमिक व जिला विद्यालय निरीक्षक करेंगे। कार्मिक विद्यालय के प्रधानाचार्य के नियंत्रण में रहेंगे। वहीं, उनकी उपस्थिति प्रमाणित करेंगे और प्रधानाचार्य की संस्तुति पर ही पारिश्रमिक दिया जाएगा।

जिला और मंडल पर टेंडर से भी नियुक्ति: राज्य सरकार वैसे एक संस्था को ही यह दायित्व सौंपने की तैयारी में है। साथ ही जिला व मंडल स्तर पर भी टेंडर निकालकर नियुक्ति की जा सकती है लेकिन, पूरा जोर केंद्रीयकृत व्यवस्था लागू करने पर है। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि इस कार्य से राज्य सरकार पर व्यय भार नहीं पड़ेगा, क्योंकि नियमित कर्मचारी पर प्रतिमाह करीब बीस हजार रुपये का व्यय होता है, जबकि अकुशल कार्मिक पर व्यय 10 हजार 289 रुपये का ही आएगा। साथ ही इन कार्मिकों को दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में भी कार्य करने में कोई कठिनाई नहीं होगी।

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