एआरपी चयन प्रक्रिया शिक्षकों को रास नहीं आ रही

कौशांबी : परिषदीय स्कूलों के बच्चों को हंिदूी, गणित, विज्ञान, अंग्रेजी व सामाजिक विज्ञान की शिक्षा देने के लिए ब्लॉक स्तर पर एआरपी (एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) का चयन किया जाना है। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग में प्रक्रिया चल रही है, लेकिन विभागीय प्रक्रिया शिक्षकों को रास नहीं आ रही है। विभाग ने खुद की पूरी व्यवस्था को संदिग्ध बना दिया है। जिससे शिक्षक परेशान हैं।

जिले में आठ ब्लाक हैं। प्रत्येक ब्लाक में पांच-पांच विषयों के अलग-अलग शिक्षकों का चयन एआरपी में होना है। यह अपने विद्यालय में शिक्षण कार्य करने के साथ ही अन्य स्कूलों जाकर अपने-अपने विषय को लेकर छात्रों को अलग से शिक्षित करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य है कि जहां पर शिक्षकों को किसी विषय में समस्या आ रही है वहां एआरपी पहुंचकर उसका निदान करेंगे।

करीब एक माह पहले एआरपी के चयन के लिए विज्ञप्ति निकाली गई, जिसकी तीन बार तिथियां निर्धारित की गई। इस पर भी 40 पदों के सापेक्ष केवल 38 शिक्षकों ने आवेदन किया। 28 नवंबर को परीक्षा हुई तो मात्र 33 शिक्षक ही परीक्षा में शामिल हुए। जिसमें 13 शिक्षक ही परीक्षा पास कर सके। इनका साक्षात्कार व मॉडल टीचिंग का टेस्ट भी लिया गया।

इस दौरान मात्र 12 शिक्षक ही आए। अब विभाग ने चयनित शिक्षकों की सूची जारी किए बिना दोबारा एआरपी चयन के लिए विज्ञप्ति जारी कर दी। विभाग के इस कदम से यह तय नहीं हो पा रहा है कि विज्ञप्ति किस आधार पर निकाली गई। जिन शिक्षकों ने पूर्व में परीक्षा पास की है उनको कहां पर तैनात किया जाएगा। किस ब्लाक में कितनी रिक्तियां है यह भी तय कर पाना शिक्षकों के लिए कठिन है। अब वह आवेदन के लिए चकरघिन्नी बनकर बीआरसी व विभागीय कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

पूर्व में चयनित एआरपी को ब्लाक आवंटित करने के बाद ही नए एआरपी को तैनाती मिलेगी। तैनाती के लिए राज्य परियोजना से निर्देश मांगा गया है। जवाब मिलने पर ही आगे की प्रक्रिया होगी। – स्वराज भूषण त्रिपाठी, बीएसए कौशांबी।

क्या है तैनाती का नियम

एआरपी की तैनाती के लिए शासन की ओर से स्पष्ट निर्देश है कि साक्षात्कार आयोजन के तीन दिवस के अंदर चयनित शिक्षकों की सूची जारी कर दिया जाए। साथ ही प्राप्तांक की मेरिट के आधार पर अवरोही क्रम में उनसे विकल्प लेकर ब्लाकों में एक सप्ताह के अंदर तैनाती दे दी जाए। उसके बाद बचे हुए पदों पर विज्ञप्ति निकाली जाए। कौशांबी में इस नियम का पालन नहीं किया गया। बिना चयनित शिक्षकों को तैनाती दिए ही दूसरे शिक्षकों से एआरपी पद के लिए आवेदन मांग लिया गया।

चहेतों को मनचाही तैनाती देने का खेल तो नहीं

एआरपी के लिए जरूरी नहीं है कि शिक्षक जिस ब्लाक क्षेत्र में तैनात हो उसको उसी ब्लाक की जिम्मेदारी दी जाए। ऐसे में तमाम ऐसे शिक्षक हैं जो प्रयागराज से सटे ब्लाकों में जाना चाहते हैं। इसके लिए वह कोई भी कीमत देने के लिए तैयार बैठे हैं। ऐसे में एआरपी मनचाहे ब्लाक में तैनाती का बेहतर विकल्प हो सकता है। ऐसे में शिक्षक विभागीय मिलीभगत से मनचाहे स्थान पर पहुंच सकते हैं। विभाग का अब तक चयनित शिक्षकों को कार्यभार ग्रहण न कराना और उनसे तैनाती के लिए विकल्प न लेना इस ओर इशारा कर रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने इस प्रकार की संभावना से इन्कार किया है।

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