एलटी ग्रेड : अर्हता के विवाद में चयन के बाद भी फंसी नियुक्ति

एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के तहत हिंदी में सहायक अध्यापक के पदों पर चयनित होने के बावजूद सवा सौ अभ्यर्थी नियुक्ति मिलने का इंतजार कर रहे हैं। अर्हता के विवाद में उनकी नियुक्ति फंसी हुई है। इनमें से कई अभ्यर्थी ओवरएज भी हो रहे हैं। अगर उन्हें नियुक्ति नहीं मिली तो भविष्य के लिए भी उनके रास्ते बंद हो जाएंगे। अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष से मांग की है कि उनकी नियुक्ति की संस्तुति माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को शीघ्र भेजी जाए।

आयोग की ओर से एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा 29 जुलाई 2018 को आयोजित की गई थी। 15 विषयों में एलटी ग्रेड शिक्षकों के 10768 पदों पर भर्ती होनी थी। इनमें हिंदी विषय में सहायक अध्यापक के 1433 पद शामिल थे, जिनमें 696 पद पुरुष और 737 पद महिला वर्ग में थे। हिंदी विषय में एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के लिए आयोग ने अर्हता निर्धारित की थी कि अभ्यर्थी के पास इंटरमीडिएट में संस्कृत विषय रहा हो। साथ ही बीए में हिंदी विषय रहा हो और बीएड की डिग्री हो। तमाम अभ्यर्थी ऐसे थे, जिनके पास इंटरमीडिएट में संस्कृत विषय नहीं था, फिर भी उन्होंने आवेदन किए थे।

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नियम है कि आवेदन की अंतिम तिथि तक अभ्यर्थी के पास अर्हता होनी चाहिए। इन अभ्यर्थियों ने एकल विषय संस्कृत से इंटरमीडिएट की परीक्षा दे रखी थी। उन्हें आवेदन की अंतिम तिथि तक रिजल्ट जारी होने की उम्मीद थी। आवेदन 15 मार्च 2018 से 16 अप्रैल 2018 तक लिए गए थे, लेकिन 16 अप्रैल तक यूपी बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट घोषित नहीं हुआ। रिजल्ट 29 अप्रैल 2018 को जारी किया गया था। बाद में कोर्ट के आदेश पर आयोग ने चार से 14 जून तक अलग से आवेदन लिए। परीक्षा का रिजल्ट आया तो तकरीबन 130 चयनति अभ्यर्थियों की अर्हता पर विवाद हो गया, क्योंकि इन्होंने एकल विषय संस्कृत से यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी, लेकिन उनका रिजल्ट आवेदन की अंतिम तिथि 16 अप्रैल के बाद आया था।

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वहीं, अभ्यर्थियों का कहना था कि आयोग ने चार से 14 जून तक दोबारा आवेदन लिए। आवेदन की अंतिम तिथि 14 जून हो गई। ऐसे में अभ्यर्थियों को भर्ती के लिए अर्ह माना जाए। आयोग ऐसे चयनित अभ्यर्थियों के अभिलेखों का सत्यापन भी करा चुका है, लेकिन अर्हता तिथि पर निर्णय न हो पाने के कारण चयनितों की फाइलें आयोग में ही पड़ी हुईं हैं। प्रतियोगी छात्र मोर्चा के अध्यक्ष विक्की खान का कहना है कि अगर अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया गया और चयन के बाद उनके अभिलेखों का सत्यापन भी हुआ तो उन्हें नियुक्ति भी मिलनी चाहिए। विक्की खान ने आयोग के अध्यक्ष से मांग की है कि अर्हता का विवाद दूर करते हुए चयनितों की नियुक्ति की सिफारिश माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को शीघ्र भेजी जाए।

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