परिषदीय स्कूलों में 25 व 26 मार्च को होने जा रही वार्षिक परीक्षा

लखनऊ : कोरोना महामारी के कारण साढ़े ग्यारह महीने बंद रहने के बाद खुले परिषदीय स्कूलों में 25 व 26 मार्च को होने जा रही वार्षिक परीक्षा में असल इम्तिहान तो डिजिटल लर्निंग का होगा जिसके माध्यम से बेसिक शिक्षा विभाग बंदी के दौरान बच्चों की पढ़ाई करा रहा था। वार्षिक परीक्षा के नतीजे बताएंगे कि कोरोना काल में परिषदीय स्कूलों के बच्चों को पढ़ाने के लिए अख्तियार किया गया यह तरीका कितना कारगर रहा और ज्ञानार्जन के लिए बच्चों ने ऑनलाइन शिक्षा को किस तरह से आत्मसात किया।

कोरोना की आहट होते ही पिछले साल 13 मार्च को प्रदेश में कक्षा एक से 8 तक के सभी स्कूल बंद कर दिये गए थे। परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक सत्र 2019-20 की वार्षिक परीक्षा न संपन्न हो पाने के कारण सभी बच्चों को बगैर इम्तिहान अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया था। शैक्षिक सत्र 2020-21 में परिषदीय स्कूल कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई के लिए 10 फरवरी और प्राथमिक कक्षाओं की पढ़ाई के लिए बीती एक मार्च को ही खुले हैं। परिषदीय स्कूलों की बंदी के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग ने बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दी। बच्चों की पढ़ाई के लिए वाट्सएप, यू ट्यूब, दीक्षा एप आदि डिजिटल माध्यमों का भरपूर उपयोग किया गया। दूरदर्शन व रेडियो पर शैक्षिक कार्यक्रम भी प्रसारित किये गए। एक तरह से देखा जाए तो परिषदीय स्कूलों के बच्चों को इस सत्र में क्लासरूम टीचिंग के लिए न के बराबर समय मिला। मोटे तौर पर इस सत्र में पढ़ाई के लिए बच्चे डिजिटल लर्निंग माध्यमों पर ही निर्भर रहे।

परिषदीय विद्यालयों के खुलने के चंद दिनों बाद ही बच्चों की वार्षिक परीक्षा होने जा रही है। परीक्षा का मकसद बच्चों के शैक्षिक स्तर का आकलन करना है। यह बात और है कि परीक्षा के रिजल्ट घोषित होने के बाद सभी बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाएगा। परीक्षा भले ही बच्चे देंगे लेकिन कसौटी पर होगी ऑनलाइन शिक्षा जिसका बेसिक शिक्षा विभाग ने खूब ¨ढढोरा भी पीटा था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.