बीएसए ने लगाई मातहतों की क्लास

  

आगरा: अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा के हाईकोर्ट अवमानना में फंसने और जमानती वारंट जारी होने से बेसिक शिक्षा विभाग में खलबली है। हालांकि बीएसए ने कोर्ट में शिक्षक की ग्रेच्युटी की ब्याज भी जारी करने का जवाब दाखिल कर मामला साधने की कोशिश की, लेकिन इसमें देरी कैसे हुई और मामला अवमानना तक कैसे पहुंचा, इसकी जानकारी जुटाना भी उन्होंने शुरू कर दिया है। कोर्ट से लौटने पर उन्होंने मतहतों की जमकर फटकार लगाई।

मामला विभाग के बड़े अधिकारी पर कोर्ट की गाज से जुड़ा था, लिहाजा विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों को डर था कि लापरवाही का ठीकरा कहीं उनके सिर न फूटे। बचने को आनन-फानन में ब्याज भुगतान का आदेश न होने का जवाब तैयार कर बीएसए तय तिथि पर कोर्ट में हाजिर हुए। साथ ही उसके जल्द भुगतान का भरोसा दिला मामला साधने की कोशिश की। फिलहाल कोर्ट ने आगे कार्रवाई न करने के संकेत दिए हैं, फिर भी उच्चाधिकारी की व्यक्तिगत पेशी के मामले में खुद और विभाग पर कार्रवाई का खतरा मंडराता देख पेशी से लौटते ही बीएसए ने लेखा और विभाग के जिम्मेदार मातहतों को बुलाकर कड़ी फटकार लगाई। यह भी जानने की कोशिश की, कि जब मामला कोर्ट में था, तो समय से जवाब क्यों दाखिल नहीं किए गए, जिससे नौबत अवमानना तक पहुंच गई।

यह था मामला : आगरा में तैनात रहे सहायक अध्यापक निसार अहमद की बेवा नूरजहां की अवमानना याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद उप्र के अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार के खिलाफ आदेश अवहेलना पर जमानती वारंट जारी किया था। कार्रवाई चार जनवरी 2018 को आठ फीसद ब्याज के साथ ग्रेच्युटी भुगतान का आदेश कोर्ट को लेकर की। विभाग ने ग्रेच्युटी का भुगतान तो किया, लेकिन ब्याज का नहीं। कोर्ट ने अवमानना मानते हुए आदेश पालन करने या स्पष्टीकरण के साथ हाजिर होने के निर्देश दिए थे।

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