68500 शिक्षक भर्ती-एक बरस में दोषियों पर कार्रवाई भी नहीं हो सकी

योगी सरकार की पहली शिक्षक भर्ती जिसके लिए लिखित परीक्षा कराई गई। बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों के लिए 68500 सहायक अध्यापक चयन परीक्षा का परिणाम 13 अगस्त 2018 को आया था। वह तारीख फिर आ गई है लेकिन, रिजल्ट के साथ शुरू विवाद अब तक खत्म नहीं हो सके हैं। इस दौरान शासन को तीन चरणों में नियुक्तियां देनी पड़ी और चौथा चरण शुरू करने की तैयारी है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी हाईकोर्ट की शरण लेकर नियुक्ति पाने के लिए पैरवी कर रहे हैं।

परिषदीय स्कूलों की 68500 शिक्षक भर्ती की लिखित 13 अगस्त को आया था। भर्ती की लिखित परीक्षा में 41556 ही उत्तीर्ण हुए थे। अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन पर गंभीर सवाल उठाए। तमाम मेधावियों को चंद देकर अनुत्तीर्ण करार दे दिया गया था। उच्च स्तरीय समिति को जांच में अनियमितताएं मिलीं। सरकार को पुनमरूल्यांकन का आदेश करना पड़ा। उसमें साढ़े चार हजार से अधिक सफल हुए हैं। इस भर्ती में कदम-कदम पर गड़बड़ियां हुई, चयनितों को नियुक्ति देते समय भर्ती की सीटों की जगह सफल अभ्यर्थियों की संख्या पर आरक्षण लागू किया गया, इसमें छह हजार से अधिक अभ्यर्थी बाहर हुए।

इसीलिए तीन चरण में नियुक्तियां हुईं, पहली 34660, दूसरी 6127 और तीसरी पुनमरूल्यांकन के बाद 4596 को स्कूलों में तैनाती दी गई। अभ्यर्थियों ने पुनमरूल्यांकन को भी कोर्ट में चुनौती दी और नौ और को नियुक्ति देने की तैयारी चल रही है। वहीं, सैकड़ों अभ्यर्थी अब भी कोर्ट के जरिए नियुक्ति पाने के लिए पैरवी कर रहे हैं। यह भर्ती कब पूरा होगी तय नहीं है।

जांच शुरू नहीं, कार्रवाई का इंतजार: सीबीआइ ने जांच शुरू नहीं की है। जिन शिक्षक और पर्यवेक्षकों ने गलत मूल्यांकन किया और कराया उन्हें नोटिस दी गई है, सभी के जवाब का इंतजार है। 23 शिक्षक व सात पर्यवेक्षक इसकी जद में आ चुके हैं। जवाब आने के बाद कार्रवाई करेंगे।

51 फर्जी शिक्षकों का प्रकरण शासन में: भर्ती की लिखित परीक्षा में फेल, किंतु रिजल्ट में उत्तीर्ण होकर 53 अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिली, उनमें से दो पुनमरूल्यांकन में सफल हुए, बाकी को शिक्षक पद से हटाने के लिए पत्र लिखा गया है, इस पर शासन में मंथन चल रहा है। उसके बाद कार्रवाई होगी।

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