लंबे इंतजार के बाद फीस वापसी प्रक्रिया शुरू

  

प्रयागराज : सपा शासन की शिक्षक भर्ती की फीस वापसी की प्रक्रिया लंबे इंतजार के बाद शुरू हो रही है। हालांकि सभी अभ्यर्थियों की सूची अभी फाइनल नहीं हो सकी है, जिनको धन वापस करना है। बेसिक शिक्षा परिषद मुख्यालय से कुछ जिलों ने धन की डिमांड जरूर की है। ऐसे जिलों में अनुमोदन भेजा जा रहा है। बाकी जनपद व डायटों पर अभ्यर्थियों के फीस वापसी आवेदन पत्रों का मिलान चल रहा है। यह कार्य पूरा होते ही उनके अकाउंट में फीस वापस कर दी जाएगी।

30 नवंबर 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के शासनकाल में 72825 शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई थी। प्रदेश में सपा की सरकार आने पर इन पदों के लिए शैक्षिक मेरिट के आधार पांच दिसंबर 2012 को नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया गया। शीर्ष कोर्ट तक यह मामला पंहुचा तो टीईटी मेरिट पर ही नियुक्ति के निर्देश हुए। उससे पहले ही 5 दिसंबर 2012 विज्ञापन के तहत हजारों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग जिलों में नियुक्ति पाने के लिए आवेदन किए, इसके लिए बड़े पैमाने पर फीस अदा की। 23 फरवरी 2015 को सपा शासनकाल में ही फीस वापसी का आदेश हुआ था लेकिन, उसका अनुपालन नहीं हो सका। अक्टूबर 2018 में योगी सरकार ने फीस वापसी का निर्णय लिया। दो नवंबर 2018 को परिषद की ओर से आदेश जारी हुआ। अभ्यर्थियों से 3 से 30 नवंबर तक साक्ष्य सहित आवेदन लिए गए।

बेसिक शिक्षा अधिकारियों को एक से 15 दिसंबर तक डाटा से आवेदन पत्रों का मिलान करना था। फीस वापसी के लिए वैध आवेदन पत्रों की सूची को अंतिम रूप 16 से 22 दिसंबर तक देने के निर्देश थे। यह भी कहा गया कि 23 दिसंबर से 7 जनवरी तक बेसिक शिक्षा परिषद डायट प्राचार्यो को धनराशि आवंटित करेगा और 8 से 23 जनवरी तक डायट प्राचार्य अभ्यर्थियों के खाते में धनराशि सीधे भेजेंगे। लेकिन यह समय सारिणी परवान नहीं चढ़ सकी। बीएसए व डायट प्राचार्य अब तक उन अभ्यर्थियों की सूची तैयार नहीं कर सके हैं, जिन्हें फीस वापस की जानी है, बल्कि कुछ जनपदों ने यह कार्य जरूर पूरा कर लिया है। वहां से धन की डिमांड होने पर उसका अनुमोदन भेजा जा रहा है। परिषद मुख्यालय की मानें तो अब इसमें तेजी आएगी और जल्द ही सभी को फीस वापस मिलेगी।

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