68500 शिक्षक भर्ती पर एक बार फिर लटकी सीबीआई जांच की तलवार

योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा की गई परिषदीय स्कूलों के लिए शिक्षक भर्ती पर फिर से सीबीआइ जांच का साया मंडराने लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बार प्रदेश सरकार से जबाब माँगा है। लेकिन राज्य सरकार शिक्षक भर्ती में व्यापक धांधली होने का आरोप लगातार खारिज कर रही है, वहीं अभ्यर्थियों का एक वर्ग शिक्षक भर्ती की सीबीआई जांच कराने की मांग पर अड़ा है। अब सीबीआई जांच सरकार के जवाब और शीर्ष कोर्ट के निर्णय पर निर्भर है।

उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 68500 शिक्षक भर्ती पहली बार लिखित परीक्षा के द्वारा कराई गई थी। लिखित परीक्षा का परिणाम 13 अगस्त 2018 को घोषित होने के बाद परीक्षा मूल्यांकन को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। लिखित परीक्षा में काम कम अंक मिलने पर तमाम अभ्यर्थियों ने परीक्षा नियामक कार्यालय पर प्रदर्शन किया था। सरकार ने शिक्षक भर्ती की जाँच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई। समिति ने भी माना कि तमाम अभ्यर्थी कॉपी पर अनुत्तीर्ण हैं लेकिन, नियुक्ति पा गए हैं और कई कॉपी पर उत्तीर्ण होकर भी नियुक्ति से दूर हैं। उसी बीच अभ्यर्थी सोनिका देवी ने कम अंक मिलने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, परीक्षा संस्था ने जो उत्तर पुस्तिका कोर्ट में दी वह किसी अन्य अभ्यर्थी की थी। इसमें पता कि उत्तर पुस्तिकाओं की भी अदला-बदली की गई है। वहीं, कोर्ट के आदेश पर अभ्यर्थियों को दी गई कॉपियों और रिजल्ट के अंक मेल नहीं खा रहे थे। सरकार ने इस प्रकरण में परीक्षा नियामक कार्यालय के अधिकारियों को निलंबित करने के साथ ही शासनादेश के इतर जाकर कॉपियों का दोबारा मूल्यांकन कराया। जो अभ्यर्थी पुनमरूल्यांकन में उत्तीर्ण मिले उन्हें नियुक्ति दी जा चुकी है। उसी दौरान हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने भर्ती की सीबीआई जांच का आदेश दिया। इसके विरुद्ध शासन ने डबल बेंच में अपील की, फरवरी में डबल बेंच ने सीबीआई जांच के आदेश पर रोक लगा दी। यह मामला अब शीर्ष कोर्ट पहुंच गया है। जिन अभ्यर्थियों को काम अंक मिले है, वह सीबीआइ जांच कराने की मांग पर अड़े है। अब सरकार के जवाब व शीर्ष कोर्ट के निर्णय पर यह जांच निर्भर हो गई है।

शासन ने इस भर्ती में नियमों को बदलने का रिकॉर्ड बनाया है इसीलिए भर्ती शुरू से ही विवादों में घिर गई और अब तक जांच आदि से उसका पीछा नहीं छूट रहा है। जिन अधिकारियों को शासन ने निलंबित किया था, उन्हें तय समय में आरोपपत्र तक नहीं दिए गए, इसका लाभ पाकर वे बहाल हो गए। अभ्यर्थियों में इसका गलत संदेश गया। वहीं, जो अभ्यर्थी दोबारा मूल्यांकन में कॉपी पर अनुत्तीर्ण मिले हैं उन्हें बाहर करने के लिए अब तक निर्णय नहीं हो सका है, वे लगातार कार्य कर रहे हैं।

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