68500 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े विवादों पर एक नजर

प्रदेश में परिषदीय स्कूलों के लिए चल रही 68500 sahayak shikshak bharti की लिखित परीक्षा में हुई गड़बड़ियों ने चार बड़े विवादों को जन्म दे दिया है। मौजूदा सरकार की सबसे बड़ी शिक्षक भर्ती में जिस तरह के विवाद सामने आये है उनका सुलझना जल्द संभव नहीं दिख रहा। इस शिक्षक भर्ती में 40 हजार से अधिक अभ्यर्थियों को नौकरी पा चुके है, लेकिन ऐसे सैकड़ों योग्य अभ्यर्थी भी हैं जो विभाग की गलती के कारण दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। पिछले दिनों हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यह साफ कर दिया कि शिक्षक भर्ती उसके निर्णय के अधीन होंगी। फिलहाल शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय कमेटी शिक्षक भर्ती से जुड़े सभी मामलों पर अपनी रिपोर्ट जल्द सौंपने जा रही है।

योग्य अभ्यर्थियों को नहीं मिली नौकरी : 68500 shikshak bharti कि लिखित परीक्षा में हुई अनियमितताओं के चलते कई योग्य अभ्यर्थियों को नौकरी नहीं मिली पाई। हाईकोर्ट में अनुसूचित जाति वर्ग की छात्रा सोनिका देवी के मामले में यह साबित हो गया कि उनकी कॉपी बदली गई है। 13 अगस्त को परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर जारी रिजल्ट में 23 फेल अभ्यर्थियों को पास कर दिया गया था। इन 23 फेल अभ्यर्थियों में दो ऐसे अभ्यर्थी भी थे जिन्होने शिक्षक भर्ती परीक्षा दी ही नहीं, लेकिन उनको परीक्षा में उत्तीर्ण कर दिया। शिक्षक भर्ती में कई ऐसे अभ्यर्थी भी थे जो हकीकत में उत्तीण थे लेकिन उनको फेल कर दिया गया। उदाहरण के तौर पर आपको बताता हूँ। अंकित कुमार वर्मा को कॉपी पर 122 नंबर मिले थे लेकिन परिणाम में 22 देकर फेल कर दिया गया। इस शिक्षक भर्ती में अंकित वर्मा और सोनिका देवी जैसे तमाम उदाहरण मिल जायेंगे। जोकि गलत परिणाम के कारण सहायक शिक्षक नहीं बन सके हैं।

पूर्णांक/प्राप्तांक गलत होने से बाहर सैकड़ों : ऑनलाइन आवेदन के समय पूर्णांक/प्राप्तांक गलत भरने के कारण सैकड़ों अभ्यर्थी इस भर्ती से बाहर हो गये। अभ्यर्थियों द्वारा लिखित परीक्षा के लिए जो ऑनलाइन जानकारी दी थी उसी के आधार पर काउंसिलिंग करा दी गई। अभ्यर्थी द्वारा ऑनलाइन दी गई सूचनाएं मूल सूचनाएं से भिन्न होने के कारण नियुक्ति पत्र रोक लिया गया है। सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों से शासन ने अभ्यर्थियों की जानकारी मांगी है। ऐसे अभ्यर्थियों का भविष्य सरकार पर निर्भर है।.

जिला आवंटन में अनियमितता से नाराजगी : भर्ती के लिए अभ्यर्थियों को दो बार जिला आवंटन सूची जारी होने के कारण अनियमितता पाई गई। 34660 अभ्यर्थियों को पहली बार 31 अगस्त जिला आवंटित किया गया था। जिला आवंटित सूचि में छह हजार से अधिक योग्य अभ्यर्थियों का नाम न होने के कारण बवाल हुआ तो 6127 आवेदकों को आनन-फानन में जिला आवंटन किया गया। दूसरी जिला आवंटित सूचि में कम मेरिट वाले सामान्य वर्ग के शिक्षकों को उनके पसंदीदा पहले या दूसरे जिले का विकल्प मिल गया लेकिन पहली लिस्ट में उनसे अधिक मेरिट वाले शिक्षकों को उनके घर से सैकड़ों किमी दूर के जिले दिये गये थे। इसे लेकर पहली लिस्ट के हाई मेरिट वाले शिक्षकों में नाराजगी है और कई ने हाईकोर्ट में याचिकाएं भी कर दी हैं।

30/33 प्रतिशत वाले फेल भी मांग रहे अवसर : 68500 शिक्षक भर्ती में 30/33 प्रतिशत अंक वाले असफल अभ्यर्थी भी अवसर मांग कर रहे हैं। शासन ने 21 मई को अर्हता अंक में बदलाव करते हुए सामान्य व ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को 49 नंबर (33 प्रतिशत) जबकि एससी/एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों को 45 नंबर (30 प्रतिशत) पर पास करने का आदेश दिया था। लेकिन परिणाम नौ जनवरी के शासनादेश में दिए गए अर्हता अंक 67 (45 प्रतिशत) नंबर पाने वाले सामान्य व ओबीसी जबकि 60 अंक (40 प्रतिशत) अंक पाने वाले एससी/एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया। जो अभ्यर्थी 30/33 प्रतिशत के कटऑफ में असफल हो रहे हैं वे भी भर्ती में अवसर की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि 68500 भर्ती में 27 हजार से अधिक खाली है। ऐसे में उन्हें अवसर मिलना चाहिए।

पढ़ें- 72825 Shikshak Bharti Vigyapti Release

68500 Sahayak Shikshak Bharti

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *