परिषदीय स्कूलों की 68500 की लिखित परीक्षा अब मूल्यांकन को लेकर विवादों में

इलाहाबाद : परिषदीय स्कूलों के लिए हुई 68500 की लिखित परीक्षा का मूल्यांकन विवादों से घिर गया है। लिखित परीक्षा के अभ्यर्थियों का कहना है कि किसी भी एग्जाम में ओवर राइटिंग व सफेदा को सही नहीं माना गया है, यदि परीक्षा में गलतियों की अनदेखी करके उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हुआ तो लिखित परीक्षा का कोई मायने नहीं होगा, क्योंकि पहले ही प्रश्नों के कई जवाब को सही ठहराकर परीक्षा की शुचिता पर पानी फेरा जा चुका है। बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए लिखित परीक्षा 27 मई को कराई गई। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव उसकी उत्तरकुंजी और संशोधित उत्तरकुंजी जारी कर चुकी हैं।

उत्तर पुस्तिका में अनुक्रमांक लिखने में चौखटे तय अंकों से कम रहे। ऐसे में तमाम परीक्षार्थी शुरुआत और अंत का अंक भरने में चूक गए। इस पर सचिव ने स्पष्ट किया कि इस गलती का विभाग मूल्यांकन में सुधार करेगा। उपस्थिति पत्रक से मिलान करके सबका रिजल्ट दिया जाएगा। इससे अभ्यर्थियों में संदेश गया कि मूल्यांकन में अन्य गलतियों की भी अनदेखी होगी। मसलन, सफेदा व ओवर राइटिंग वाले जवाब का मूल्यांकन होगा। इसी का विरोध हो रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जिन कॉपियों में सफेदा का प्रयोग हुआ हो उनका मूल्यांकन न किया जाए, क्योंकि कोर्ट भी परीक्षाओं में इस पर सख्त निर्देश दे चुका है, वहीं जिन जवाब में ओवरराइटिंग हो उनका भी मूल्यांकन न हो, क्योंकि ऐसे तो किसी भी प्रश्न का जवाब आसानी से बदला जा सकता है।

परीक्षा में कई ऐसे भी प्रश्न पूछे गए जिनके कई जवाब मान लिए गए हैं, इससे अभ्यर्थी खफा हैं। उनका कहना है कि इस इम्तिहान का मकसद अभ्यर्थियों की लिखावट की जांच करना भी रहा है, यदि वर्तनी गलत है तो उसमें अंक नहीं दिए जाने चाहिए, क्योंकि जो अभ्यर्थी सही तरीके से लिख नहीं सकता उसे शिक्षक बनने का अधिकार नहीं है। मूल्यांकन में इसमें ढिलाई होने से परीक्षा की बेमतलब होगी। अभ्यर्थियों ने कहा कि पहले दावा किया गया था कि ऐसे प्रश्न पूछे जाएंगे कि जिनका एक शब्द या वाक्य में जवाब होगा लेकिन, उसका पालन नहीं हुआ। उधर, सचिव ने कहा है कि मूल्यांकन में शासनादेश में दिए निर्देश का अनुपालन होगा। किसी प्रश्न के गलत जवाब पर अंक देने की बात सोचना सही नहीं है।

परीक्षा निरस्त: इलाहाबाद राज्य विवि की एलएलबी चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा में पांचवा प्रश्न पत्र निरस्त कर दिया गया। छात्र छात्रओं का कहना है कि रद पेपर की सूचना को विवि प्रशासन को पहले से जानकारी देनी चाहिए थी।

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