प्रदेश के 50 प्रतिशत यानी 2154 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक कॉलेज बिना मुखिया के चल रहे

माध्यमिक शिक्षा में सुधार करने के बड़े-बड़े दावे आए दिन होते हैं, लेकिन दावे हकीकत से मेल नहीं खा रहे हैं। प्रदेश के 50 प्रतिशत यानी 2154 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक कॉलेज बिना मुखिया के जैसे-तैसे चल रहे हैं। कॉलेजों में जब प्रधानाचार्य ही नहीं हैं तो वहां पढ़ाई किस तरह हो रही होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। करीब डेढ़ हजार पदों के लिए आवेदन लिए गए, उनमें से कुछ के साक्षात्कार भी हो चुके हैं, लेकिन चयन कब होगा यह तय नहीं है।

प्रदेश में 4,329 अशासकीय माध्यमिक कॉलेज संचालित हैं। वहां प्रधानाचार्य चयन का जिम्मा माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र पर है। चयन बोर्ड ने बसपा शासन 2011 में प्रधानाचार्य के 955 व सपा शासन 2013 में 599 पदों का विज्ञापन जारी करके आवेदन भी लिए थे। 2011 में घोषित पदों के लिए इंटरव्यू भी कराए गए। कानपुर मंडल को छोड़कर अन्य का साक्षात्कार हो चुका है। इसमें तमाम अनियमितताएं होने से पहले कोर्ट ने स्थगनादेश जारी किया।

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कुछ माह पहले परिणाम घोषित करने का आदेश दिया है, लेकिन अब तक अनुपालन नहीं हुआ है। वहीं 2013 विज्ञापन के आवेदनों की मंडलवार जांच प्रक्रिया कई माह से चल रही है। इसके बाद साक्षात्कार होंगे, तब परिणाम आएगा। इतना ही नहीं 2013 के बाद जिलों से प्रधानाचार्य पद के लिए करीब 700 से अधिक अधियाचन चयन बोर्ड को भेजे गए, लेकिन उसका विज्ञापन तक जारी नहीं किया गया।

आठ वर्ष में 955 व छह साल में 599 पदों पर चयन नहीं हो सका

माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने 700 से अधिक का विज्ञापन रोका

चयन कर रहे न विनियमित

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चयन बोर्ड प्रधानाचार्यो का चयन नहीं कर रहा है। वहीं, अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक रहीं अंजना गोयल ने शासन को समग्र रिपोर्ट भेजी है। उसमें कहा गया है कि चयन बोर्ड प्रकरण को लटकाए है। जिससे कार्यवाहक प्रधानाचार्यो को विनियमित करने में अड़चन है। गोयल ने स्पष्ट किया है कि नियम है कि प्रधान पद के रिक्ति की सूचना चयन बोर्ड को दी गई हो और पद दो महीने से अधिक से रिक्त हो। वहां प्रबंधतंत्र प्रधानाचार्य के पद पर प्रवक्ता श्रेणी व प्रधानाध्यापक के पद पर प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी के वरिष्ठ शिक्षक पदोन्नति तदर्थ आधार पर करेगा। इन पदों पर कार्यभार ग्रहण करने वाले प्रधानाचार्य का वेतन पा सकेंगे, लेकिन चयन बोर्ड की कार्यवाही गतिमान है इसलिए तदर्थ नियुक्ति नहीं की जा सकती है।

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