तबादला नीति के कारण 67 जिलों में कम तो कहीं ज्यादा होंगे शिक्षक

प्रयागराज : प्रदेश के हर जिले में बेसिक शिक्षा परिषद के दो तरह के विद्यालय संचालित हो रहे हैं। एक वे जहां की आवागमन की बेहतर सुविधा है, ऐसे स्कूलों में शिक्षक बहुतायत में है। दूसरे वह स्कूल जो सुदूर इलाके में हैं, वहां कम तैनात शिक्षक हैं। नए शैक्षिक सत्र में ऐसे ही हालात कई जिलों में होने की नौबत है, क्योंकि चंद दिन पहले जारी अंतर जिला तबादला नीति में शिक्षकों को सभी जिलों में जाने के विकल्प खुल गए हैं। साथ ही तबादले के लिए सेवा अवधि कम होने से आवेदन बड़ी संख्या में होने के आसार हैं।

प्रदेश भर में तमाम जिले ऐसे हैं जहां शिक्षकों की तैनाती स्वीकृत पदों के सापेक्ष है, वहीं कई ऐसे भी जिले हैं जहां शिक्षक स्वीकृत पदों से कम हैं। पिछले वर्ष अंतर जिला तबादले में निर्देश था कि ऐसे जिले जहां शिक्षकों की रिक्ति स्वीकृत पदों के सापेक्ष 15 प्रतिशत से अधिक है वहां से शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं होगा। आवेदन लेने के बाद कई जिलों के शिक्षकों का तबादला नहीं किया गया था। इस बार की तबादला नीति में कहा गया है कि किसी भी जिले में स्वीकृत पदों के सापेक्ष वर्तमान में कार्यरत कुल शिक्षकों की संख्या के 15 प्रतिशत की सीमा तक ही स्थानांतरण किया जाएगा। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि यदि किसी जिले में एक हजार पद शिक्षकों के हैं और यदि वहां 700 शिक्षक कार्यरत हैं तब भी उनमें से 15 प्रतिशत का अन्यत्र स्थानांतरण हो सकेगा। भले ही उस जिले में तबादला होने वाले शिक्षकों के सापेक्ष दूसरे जिले से शिक्षक न आएं। इस निर्देश से जिन जिलों में पहले से शिक्षक कम हैं वहां शिक्षक और कम हो जाएंगे।

तबादला नीति के अनुसार केवल आठ आकांक्षी जिलों में ही शिक्षक संख्या में बदलाव नहीं होगा, क्योंकि वहां से उतने ही शिक्षकों का तबादला होगा, जितने वहां आने को तैयार होंगे। नीति में यह भी कहा गया है कि वर्ष में एक बार ही तबादले होंगे, ऐसे में जहां शिक्षक कम हो जाएंगे वहां भरपाई साल भर नहीं होगी। पिछले वर्ष जब पांच व तीन साल की सेवा अवधि का नियम था तब 37 हजार से अधिक आवेदन हुए थे, इस बार सेवा अवधि घटा दी गई है इससे आवेदकों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी होना तय है। अब सभी की निगाहें जिलों की रिक्तियों पर लगी हैं।

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