शिक्षक भर्ती के रिजल्ट पर निर्भर वेटेज अंक

इलाहाबाद : परिषदीय स्कूलों की 68500 सहायक अध्यापकों की भर्ती की लिखित परीक्षा में जिस तरह से 18 हजार अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ी। प्रश्नपत्र भी टीईटी की तर्ज पर स्तरीय रहा है। ऐसे में परीक्षा का रिजल्ट प्रतिशत बहुत अधिक होने के आसार नहीं है। तय सीटों से कम अभ्यर्थी सफल होने पर शिक्षामित्रों को मिलने वाले वेटेज अंकों का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। यह जरूर है कि सरकार नियुक्ति से पहले शिक्षामित्रों को आयु सीमा में छूट का एलान करेगी।

प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी शिक्षक भर्ती की पहली लिखित परीक्षा हो चुकी है। परीक्षा शांतिपूर्ण व नकलविहीन होने का दावा किया गया है। इम्तिहान से करीब 18 हजार अभ्यर्थियों ने किनारा किया है, उससे कुल अभ्यर्थियों की घटकर अब एक लाख सात हजार रह गई है। परीक्षार्थियों की मानें तो प्रश्नपत्र आसान नहीं था, बल्कि स्तरीय रहा है। इससे स्पष्ट है कि रिजल्ट का सफलता प्रतिशत बहुत अधिक नहीं होगा। टीईटी 2017 का रिजल्ट पांच वर्षो में सबसे कम आया, जबकि डीएलएड व बीटीसी की सेमेस्टर परीक्षाओं में असफल होने वालों की तादाद बढ़ी है। परीक्षार्थी बताते हैं कि शिक्षक भर्ती परीक्षा में प्रश्नों का जवाब लिखने के कारण बहुत कम अभ्यर्थी पूरे सवाल कर पाए हैं।

अधिकांश ने 100 से 125 प्रश्नों का जवाब लिखा है। वहीं, ऐसे भी तमाम अभ्यर्थी रहे हैं, जो एक सौ प्रश्न तक नहीं पहुंच पाए। सरकार ने अंतिम दौर में उत्तीर्ण प्रतिशत में कमी कर दी, जिससे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। शिक्षक भर्ती की तय सीटों के आसपास परिणाम आने पर शीर्ष कोर्ट के निर्देश पर शिक्षामित्रों को मिलने वाले वरीयता अंक का कोई मतलब होगा। मनचाहे जिले में नियुक्ति में ही सहायक बनेंगे।

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