योगी अंकल.. कॉपी में गिरता है पसीना, कैसे लिखें?

योगी  अंकल.. कॉपी में पसीना गिरता है कैसे लिखें? ये गुहार कक्षा एक से आठ तक के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से है। इन स्कूलों में न तो बिजली है, न ही पंखे। सीबीएसई की तर्ज पर सरकारी स्कूलों को चलाने के दावों की पोल इसी से खुल जाती है कि जिले के करीब 1093 स्कूलों में बिजली की सप्लाई ही नहीं है। वहीं ज्यादातर सीबीएसई स्कूल के बच्चे एसी में बैठकर पढ़ते हैं। गर्मी में बच्चे बिना पंखे के पढ़ने को मजबूर हैं। जिले में 1774 प्राइमरी व 735 जूनियर हाईस्कूल हैं। इनमें 2.47 लाख बच्चे पढ़ते हैं। चुनाव के दौरान इन स्कूलों में से 1093 स्कूलों को चिह्न्ति किया गया था जिनमें बिजली की सप्लाई नहीं थी। चुनाव आयोग के डंडे के चलते इनमें अस्थाई बिजली की व्यवस्था की गई मगर, बाद में स्थिति जस की तस हो गई।

कैसे मिले हवा : अफसरों का कहना है कि चुनाव के दौरान 6955 रुपये प्रति स्कूल वाह्य संयोजन व 6955 रुपये प्रति स्कूल आंतरिक संयोजन के हिसाब से 13910 रुपये प्रति स्कूल का बजट मिला। कुछ साल पहले यही बजट करीब 26 से 27 हजार रुपये प्रति स्कूल मिलता था। महंगाई दोगुनी हो गई मगर बजट लगभग आधा कर दिया गया। आंतरिक संयोजन में फिटिंग, पंखे, ट्यूबलाइट आदि खर्च 6955 में कैसे संभव होंगे? वहीं बाह्य संयोजन में बिजली के खंभे लगवाकर इतनी राशि में स्कूल तक तार दौड़ाना भी मुश्किल होता है।

जहां पंखे हैं वहां कनेक्शन कटने के आसार विद्युत विभाग का करीब 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया बेसिक शिक्षा विभाग पर है। इसके चलते विद्युत विभाग ने करीब 300 स्कूलों की बिजली काटने का फैसला भी किया था। इस राशि में से अभी मात्र 3.40 लाख रुपये का ही भुगतान किया गया है। जल्द ही भुगतान न होने पर स्कूलों के कनेक्शन कटने की भी कार्रवाई हो सकती है।

विद्युतीकरण की स्थाई व्यवस्था का काम जारी है, चिह्नंकन भी हो रहा है। कम बजट से काम रुकता है। जितना बजट आया विद्युत विभाग को दे दिया गया। कोशिश है जल्दी सभी बच्चों को हवा व बिजली उपलब्ध कराई जाए।  धीरेंद्र कुमार, बीएसए  अतरौली के गांव बहरावद स्थित प्राथमिक विद्यालय में बिना पंखे के गर्मी में पढ़ते बच्चे – News Source-  Jagran

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