अध्यापिकाओं के स्वीकार होंगे ऑनलाइन आवेदन

इलाहाबाद: अब बेसिक शिक्षा परिषद की अध्यापिकाओं को पति के निवास स्थान या ससुराल वाले जिले में जाने का मौका मिलेगा। शासन ने इस संबंध में शिक्षा निदेशक बेसिक व बेसिक शिक्षा परिषद सचिव को आदेश जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि विशेष परिस्थिति का परीक्षण कर जिलों में रिक्त पदों के सापेक्ष ही तबादले होंगे। अब परिषद जल्द ही ऑनलाइन आवेदन लेने के लिए समय सारिणी जारी करेगा और वेबसाइट पर संशोधन कराएगा।

बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों की प्रक्रिया कुछ दिनों ठप है। परिषद ने 16 से 29 जनवरी तक शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन लिए थे। वहीं, अध्यापिकाओं ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि नियमावली में उन्हें पति के निवास या फिर ससुराल वाले जिले में नियुक्ति की छूट है। ऐसे में उन पर पांच वर्ष की सेवा पूरी करने की शर्त नहीं रखी जा सकती। कोर्ट ने परिषद व सरकार को निर्देश दिया कि इन पर विचार किया जाए। ऐसे में शासन सिर्फ उन्हीं अध्यापिकाओं को पांच वर्ष की सेवा से लाभ देने की तैयारी में था, जिन्होंने याचिका दाखिल की। इसका अन्य अध्यापिकाओं ने याचिका करके विरोध किया। ऐसे में कोर्ट ने सभी शिक्षिकाओं के आवेदन लेने का आदेश दिया है।

यह प्रकरण कई दिन से शासन में लंबित रहा है। अब विशेष सचिव एस राजलिंगम ने आदेश जारी किया है कि सामान्य शिक्षकों (महिला या पुरुष) के अंतर जिला तबादले में आवेदन में पांच वर्ष की सेवा पूरी हुए विचार नहीं होगा। लेकिन, विशेष परिस्थिति में उन अध्यापिकाओं के आवेदन पत्र स्वीकार होंगे जो अपने पति के निवास स्थान या फिर ससुराल वाले जिले में जाना चाहती हैं। शासन ने आदेश दिया है कि ऐसी शिक्षिकाओं से ऑनलाइन आवेदन लेने व विशेष परिस्थति का परीक्षण कर जिले में रिक्त उपलब्धता के आधार कार्यवाही की जाए। तबादले की बाकी शर्ते 13 जून 2017 के अनुरूप होंगी।

ज्ञात हो कि जिन शिक्षकों ने आवेदन किया है उनकी काउंसिलिंग तीन फरवरी को होनी थी लेकिन, परिषद ने उसे रोक दिया था। अब जल्द ही नए आदेश जारी होंगे।

पुरुष शिक्षकों की विशेष स्थिति दरकिनार: परिषदीय स्कूलों में ऐसे तमाम पुरुष भी हैं, जो इकलौते पुत्र हैं, उनके माता-पिता गंभीर रूप से बीमार हैं या फिर खुद बीमारी व समस्या से ग्रस्त हैं। ऐसे शिक्षक भी विशेष परिस्थिति की मांग कर रहे थे, ताकि वह भी अपने जिले में लौट सकें लेकिन, उनकी मांग दरकिनार हो गई है। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई छह फरवरी को होनी है। उसके पहले ही शासन ने आदेश जारी किया है। शासन का शिक्षा निदेशक बेसिक व परिषद सचिव को आदेश जारी

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