प्रदेश में शिक्षकों के तबादले व समायोजन पर 14 सितंबर तक रोक

लखनऊ – sahayak adhyapak samayojan radd होने पर प्रदेश भर से आए हजारों शिक्षामित्रों ने मंगलवार को भी राजधानी में प्रदर्शन जारी रखा। शिक्षामित्रों ने सरकार के प्रस्ताव दस हजार रुपये मानदेय, teacher eligibility test (UPTET) और भर्ती में अधिकतम 25 अंक तक वेटेज का भी विरोध किया है। वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता और sahayak adhyapak samayojan की मांग पर अड़े हैं। प्रदर्शन के दौरान shikshamitra शैलेंद्र सिंह की हालत बिगड़ गयी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके बाद शिक्षामित्रों ने शासन और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। uttar pradesh prathamik shikshamitra sangh sanyukt morcha के प्रांतीय संरक्षक शिव कुमार शुक्ला व shikshak utthan samiti के प्रदेश अध्यक्ष शिव किशोर द्विवेदी ने बताया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जाएंगी तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

बात करने से इन्कार : दोपहर में पुलिस व प्रशासन के कई अधिकारी धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने shikshamitra से धरना समाप्त करने की मांग करते हुए अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा राज प्रताप सिंह से मुलाकात करने का प्रस्ताव रखा लेकिन, शिक्षामित्रों ने इससे इन्कार कर दिया।

अन्न-जल त्याग देंगे : प्रांतीय संरक्षक शिव कुमार शुक्ला ने कहा कि बुधवार शाम तक अगर उनकी मांगे पूरी न की गयी तो वे सत्याग्रह छोड़कर बड़ा आंदोलन करेंगे। वे अन्न-जल छोड़कर धरना देंगे।

मंच पर भिड़ीं महिलाएं : धरना स्थल स्थित मंच पर संघ के लोग शासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। तभी किसी बात को लेकर shikshamitra सुमन और रीना आपस में भिड़ गईं। बवाल बढ़ता देख संघ के पदाधिकारियों ने सुमन के हाथ से माइक ले लिया और दोनों को शांत करा दिया।

शिक्षकों के तबादले व समायोजन पर 14 सितंबर तक रोक : प्रदेश में sahayak samayojan और तबादलों पर लगी रोक फिलहाल जारी रहेगी। allahabad High Court ने रोक की अवधि 14 सितंबर तक बढ़ाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने अजय कुमार सिंह व चार अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने 31 जुलाई को सरकारी lawyer से विभाग से जानकारी लेकर कोर्ट को बताने को कहा था, लेकिन कोई जानकारी नहीं दी गई।

जिस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई तक samayojan व transfer को लागू करने से मना कर दिया है। याची के वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा और शिवेंद्र ओझा का कहना है कि नियमों व कानून के विपरीत transfer और samayojan किए जा रहे हैं। नियमानुसार विज्ञान, गणित और कला विषय के अलग-अलग अध्यापक होने चाहिए। सरकार इसकी अनदेखी कर छात्र संख्या के आधार के अतिरिक्त adhyapak samayojan कर रही है जो कि अनिवार्य शिक्षा कानून के विपरीत है। कहा कि विषयवार अध्यापक संख्या की उपेक्षा करते हुए मनमाने तौर पर समायोजन किया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

पढ़ें- madhyamik shikshak sangh demand same increment on teachers selection and promotion

 

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