एसटीएफ खंगाल रही कार्यालय के दस्तावेज

लखनऊ : मथुरा में फर्जी शिक्षकों की भर्ती के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने तत्कालीन बीएसए संजीव कुमार सिंह पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। एसटीएफ अधिकारियों ने संजीव कुमार सिंह से लंबी पूछताछ की है। इसके साथ ही एसटीएफ मुख्यालय से एक टीम को मथुरा भेजकर बीएसए कार्यालय के दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। संजीव कुमार को भी मथुरा ले जाया गया है। एसटीएफ जल्द कुछ अन्य फर्जी शिक्षकों व इस घोटाले में शामिल रहे आरोपितों को गिरफ्तार कर सकती है।

एसटीएफ ने मंगलवार को मथुरा बीएसए आफिस के कनिष्ठ लिपिक महेश शर्मा सहित 13 फर्जी शिक्षकों व दो कंप्यूटर आपरेटरों को गिरफ्तार कर फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले का राजफाश किया था। आइजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि तत्कालीन बीएसए से कई अहम बिंदुओं पर जानकारी लिए जाने के साथ ही दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। बताया गया कि 21 सितंबर 2015 को मथुरा में शिक्षक भर्ती की मेरिट सूची निकली थी, जिसमें 257 अभ्यर्थियों के नाम थे। तब किन्हीं कारणों से भर्तियां नहीं हो सकी थीं। बाद में दिसंबर 2017 में जब भर्तियां की गईं, तब बड़ा खेल कर करीब 150 फर्जी शिक्षक भर्ती कर लिए गए। बताया गया कि फर्जी शिक्षकों को जो नियुक्ति पत्र दिए गए, उनमें वर्ष 2015 में तैनात रहे बीएसए एके सिंह के जाली हस्ताक्षर भी किए गए।

अब पूरे मामले में मास्टर माइंड बताए जा रहे कनिष्ठ लिपिक महेश के अलावा तत्कालीन बीएसए सहित कई बड़ों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। तत्कालीन बीएसए संजीव कुमार सिंह का करीब 15 दिन पूर्व स्थानांतरण हो गया था। सूत्रों का कहना है कि पूर्व में फर्जी नियुक्तियों को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी शिकायतें की गई थीं। बेसिक शिक्षा निदेशक ने अपनी एक रिपोर्ट भी शासन को दी थी, जिसके बाद आरोपित लिपिक महेश सहित अन्य के खिलाफ मथुरा कोतवाली में धोखाधड़ी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद से लिपिक महेश अंडरग्राउंड हो गया था। हालांकि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी उसके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई थी। माना जा रहा है कि शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मामले में जल्द आरोपित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। इसके साथ ही जल्द अन्य जिलों में भी शिक्षक भर्ती मामले की जांच शुरू हो सकती है।

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