शिक्षामित्रों ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, दी चेतावनी

उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर 4 दिन तक धरना प्रदर्शन किया था लेकिन उस धरना प्रदर्शन का कुछ निष्कर्ष नहीं निकला शिक्षामित्रों के सिर्फ हतासा ही हाथ लगी। शिक्षामित्र हर ना मानते हुए अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वाराणसी मिलने की कोशिश में लगे है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 सितंबर को वाराणसी दौरे आ रहे है और वो यहाँ दो दिन रहेंगे। इसी दौरान शिक्षामित्र प्रधानमंत्री से मिलने की कोशिश करेंगे। तब तक के लिए शिक्षामित्रों ने अपने धरने को स्थगित कर दिया है। शिक्षामित्र संगठनों ने प्रदेश के सभी शिक्षामित्रों से आह्वान किया है कि वो अधिक से अधिक संख्या में वाराणसी पहुंचे। ताकि शिक्षामित्रों की आवाज़ सुनी जा सके और अपनी समस्या प्रधानमत्री के सामने रख सके।

पढ़ें- अर्धनग्न होकर शिक्षामित्रों ने जंतर मंतर पर किया प्रदर्शन

बीते दिनों अपने अधिकार कि लड़ाई लड़ते हुए शिक्षामित्रों ने नई दिल्ली जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया और अपने लिए अध्यादेश लाकर शिक्षक बनाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शिक्षामित्रों से वार्ता की और उन्होंने किसी भी किस्म की छूट देने से इनकार कर दिया। लेकिन शिक्षामित्र अब भी बिना TET के शिक्षक बनने की मांग पर अड़े हुए हैं। उनकी मांग है कि केंद्र सरकार बिना टेट पास किए शिक्षक बनाने के लिए कानून बनाये। वहीं अध्यापक पात्रता परीक्षा में भी वेटेज दिए जाने की मांग की है। इसके अलावा शिक्षामित्र चाहते हैं कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करे।

पढ़ें- 50 फीसदी शिक्षामित्र उपस्थित रहे

शिक्षामित्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी में शिक्षामित्रों का साथ देने का वादा किया था। प्रधानमंत्री से मिलकर उनको उनका वायदा याद दिलाया जाएगा। शिक्षामित्रों की मांग है कि उन्हें टीईटी में भी वेटेज दिया जाए, वही उन पर हो रहे फर्जी मुकदमो को भी वापस लिया जाए। 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया है। समायोजन रद्द होने के बाद से प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के के आदेश के मुताबिक छूट देने का फैसला किया है। शिक्षामित्रों को प्रतिवर्ष सेवा के लिए ढाई अंक का वेटेज दिए जाने का निर्णय लिया गया है वही टीईटी पास करने तक शिक्षामित्रों को 10000 रुपये मानदेय दिया जायेगा।

विभाग को चेताया, धमकी बर्दाश्त नहीं करेंगे

शिक्षामित्रों का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग उन्हें धमकी दे रहा है, यदि शिक्षामित्र काम पर वापस नहीं आए तो रिटायर शिक्षकों को स्कूलों में पढ़ाने के लिए बुलाया जाएगा। जितेंद्र शाही ने कहा है कि एक तरफ सरकार 50 साल के ऊपर के कर्मचारियों को जबरन रिटायर कर रही है तो दूसरी तरफ रिटायर हो चुके शिक्षकों को वापस काम पर लगाया जाएगा। विभाग की यह धमकी शिक्षामित्र बर्दाश्त नहीं करेंगे और अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करते रहेंगे।

पढ़ें- शिक्षामित्र अब 11 को जंतर-मंतर पर दिखाएंगे अपना दम

शिक्षामित्रों ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, दी चेतावनी

यदि शिक्षामित्र आज सड़क पर हैं तो इसके लिए अकेले शिक्षामित्र जिम्मेदार नहीं, वह तंत्र भी दोषी है जिसने उन्हें नौकरी पर रखा। यह बात adarsh shiksha mitra Welfare Association के प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र शाही और prathmik shiksha mitra sangh के प्रदेश अध्यक्ष गाजी इमाम आला ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर कही है। इस पत्र में उन्होंने चेतावनी भी दी कि फिलहाल आंदोलन शांतिपूर्ण है लेकिन स्थिति कभी भी विस्फोटक हो सकती है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 1.70 लाख शिक्षामित्र सड़क पर आ गए हैं। 50 से ज्यादा shiksha mitra सदमे से मर गए हैं। अब समय आ गया है कि भाजपा अपने संकल्प पत्र में शामिल शिक्षामित्रों की समस्या का हल करे।

shikshamitra wrote letter to Prime Minister

shikshamitra meet modi

0 Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.