शिक्षामित्र अपने मूल विद्यालय जाने के लिए हैं परेशान, 10 हजार वेतन में खर्च उठाना हो रहा है मुश्किल

इलाहाबाद : परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद से शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त होने के बाद से उनकी मुश्किल काम होने का नाम नहीं ले रही है। अब शिक्षामित्र अपने मूल स्कूल में जाने को लेकर परेशान है, उनकी कोई सुनने वाली नहीं है। माननीय सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से से पहले लगभग 40 हज़ार रुपये वेतन लेने वाले 1.37 लाख शिक्षामित्रों का वेतन अब 10 हजार रुपये रह गया है। जिसेसे उनको अपना जीवन यापन करने में अच्छी खासी दिक्क्त आ रही है। इस स्थिति में शिक्षामित्रों को अपने घर से लगभग 70 से 100 किमी दूर समायोजित विद्यालय में आने-जाने पर पड़ने वाला खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। जिसे कारण उनका बजट बिगड़ जाता है और घर के खर्चे जाना भी मुशिकिल हो रहा है। यही कारण है कि शिक्षामित्र अब अपने मूल विद्यालय जाना चाहते हैं। जो कि उनके गांव में ही हैं। सरकार ने समायोजन रदद् करते हुए मूल पद पर नियोजित करने की राजाज्ञा तो जारी कर दी लेकिन मूल विद्यालय में भेजने का आदेश जारी नहीं हुआ है।

100 किमी दूर तक पढ़ाने जा रहे शिक्षामित्र :

शिक्षमित्रा आप बीती बता रहे है, कि उनको कितनी दिक्क़ते आर यही है। ऐसे ही एक शिक्षामित्र है। अमर सिंह विकास खंड हंडिया से कोरांव के प्राथमिक विद्यालय लतीफ पुर में समायोजित हैं। इनके घर से विद्यालय की दूरी लगभग 106 किलोमीटर है। यदि अपने वाहन से जाये तो प्रतिदिन 200 से 300 रूपये का खर्च आता है। उनके बच्चे भी बड़े है उनकी पड़ी पढ़ाई भी करनी है और परिवार भी चलना है तो उनका कहना की अब 10000 हज़ार रूपये में परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। इसी तरह जसरा के दशरथ भारती का समायोजन कोरांव के प्राथमिक विद्यालय रतयोरा साजी में हुआ है। इनके घर से स्कूल की दूरी 70 किमी है। प्रतिदिन मोटर साईकिल से आने जाने में 200 रूपये का पेट्रोल लग जाता।

कमल सिंह प्राथमिक विद्यालय घुरमुट्ठी जसरा से प्रथमिक विद्यालय हड़ाही कोरांव में समायोजित है। इनकी भी दूरी 68 किमी है। संतोष बाबू पाल सल्लाह पुर कौड़िहार द्वितीय से धनूपुर के मसादि में समायोजित है। इनकी भी दूरी 70 किमी है। ऐसे में सवाल है कि शिक्षामित्र यदि प्रतिदिन 200 से 300 रुपये आने-जाने पर ही खर्च कर देंगे तो घर कैसे चलेगा।

शिक्षामित्र का मूल पद उनके मूल विद्यालय में है। अतएव तत्काल 150 से 200 किमी रन करने वाले शिक्षामित्रों को उनके नजदीक भेजा जाए। शिक्षामित्रों का मानदेय भी अध्यापकों की भांति प्रत्येक माह एक साथ भेजा जाए। – वसीम अहमद, जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षामित्र संघ

शिक्षामित्रों ने सचिव से लगाई गुहार

आदर्श समायोजित शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन ने कार्यालय सचिव बेसिक शिक्षा परिषद में ज्ञापन देकर मूल विद्यालय में समायोजित किए जाने की गुहार लगाई है। जिलाध्यक्ष अश्वनी कुमार त्रिपाठी, मंडलीय मंत्री शारदा प्रसाद शुक्ल आदि का कहना है कि मूल विद्यालय में नहीं भेजने के कारण शिक्षामित्रों को संकट का सामना करना पड़ रहा है।

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